धर्म का अर्थ व्यक्तिगत जीवन को शुद्ध करना है

बोकारो | रेनांसा युनिवर्सल के मंच से श्रद्धेय पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने धर्म की स्थापना में अणुजीवत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अणुजीवत धर्म को स्थापित करने में अति सूक्ष्म पर गहरा प्रभाव डालते हैं। धर्म का अर्थ व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन को संचालित करने वाला सर्वोच्च नैतिक और आध्यात्मिक सिद्धांत पर आधारित है। यह बातें आचार्य ने आनंद मार्ग प्रचारक संघ के विश्व प्राण केंद्र आनंद नगर में आयोजित धर्म महासम्मेलन के तीसरे दिन का प्रथम सत्र में कही। उन्होंने कहा कि प्रातः गुरुसकाश पांचजन्य सामूहिक साधना में अष्टाक्षर मंत्र बाबा नाम केवलम के महामंत्र से जीवन धन्य हो जाता है।

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