भास्कर न्यूज | जालंधर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के चार साहिबजादों और माता गुजरी जी, साका चमकौर साहिब और साका सरहिंद के समस्त शहीदों की स्मृति में पावन ऐतिहासिक स्थल गुरुद्वारा छेवीं पातशाही, बस्ती शेख से ‘शिखर-ए-इबादत’ प्रभातफेरी का आयोजन किया गया। श्रद्धा, प्रेम और गुरबाणी कीर्तन से परिपूर्ण इस विशेष प्रभातफेरी का आयोजन उन महान शहीदों की याद में किया गया, जिन्होंने धर्म की रक्षा और अत्याचार के विरोध में आवाज़ उठाते हुए शहादत का जाम पिया। अमृतवेले में प्रभातफेरी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के चरणों में अरदास करके शुरू हुई। सबसे आगे निशान साहिब की अगुवाई करता हुआ सिंह था। उसके बाद खालसाई शक्ति के प्रतीक नरसिंगा को बजाते हुए गुरु के लाडले महिंदर प्रताप सिंह, घुड़सवार गुरु की प्रिय सेनाएं, और उनके पीछे फूलों से सजी ट्रॉली में गुरु साहिब के शस्त्र बड़े सलीके से सजाए गए थे। कीर्तन करते हुए जब भाई जसपाल सिंह जी राजनगर वाले, प्रो. मनजिंदर कौर तथा अन्य शख्सियतों ने गुरबाणी कीर्तन से सबको निहाल किया। ‘बोले सो निहाल’ के जयकारों के साथ अमृत वेले का वातावरण नाम सिमरन की सुगंध से महक उठा। प्रभातफेरी गुरुद्वारा साहिब से चलकर वहां से माता रानी चौक, गुरु रविदास चौक से होती हुई डेरा निर्मल संतपुरा लायलपुरी में पहुंची। वहां संत रणजीत सिंह लायलपुरी और संगत ने पुष्पवर्षा करके प्रभातफेरी का स्वागत किया। डॉ. बीआर अंबेडकर चौक और भगवान वाल्मीकि चौक से होते हुई बाबा मोतीराम मेहरा जी चौक रैनक बाजार में पहुंचकर प्रभातफेरी को विश्राम दिया गया। इस मौके जसकरण सिंह, गोबिंद सिंह, जसप्रीत सिंह मक्कड़, गुरप्रीत सिंह बजाज, सिमरनजीत सिंह प्रभजोत सिंह, बलजीत सिंह मौजूद रहे।


