भास्कर न्यूज | जशपुरनगर कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र कुनकुरी में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, रांची और कृषि विज्ञान केंद्र जशपुर के संयुक्त तत्वावधान में “संरक्षण कृषि प्रौद्योगिकी द्वारा धान-परती प्रणाली प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय ब्रेन स्टॉर्मिंग कार्यशाला बुधवार को आयोजित हुई। यह कार्यक्रम पूर्वी क्षेत्र में धान-परती प्रणाली के अंतर्गत कृषि विधियों के मूल्यांकन परियोजना के तहत जनजातीय एवं अनुसूचित जाति उप-योजना अंतर्गत हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जिला पंचायत सदस्य गेंद बिहारी सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़े ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार में वृद्धि और जीवन स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, रांची केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. बाल कृष्ण झा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में अधिकांश किसान केवल धान की एकल फसल लेते हैं। यदि धान कटाई के बाद शून्य जुताई तकनीक से मसूर, सरसों, चना, तीसी जैसी फसलों की बुवाई की जाए, तो शेष नमी का प्रभावी उपयोग कर किसान रबी एवं जायद फसलें ले सकते हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में संरक्षण कृषि तकनीक किसानों को अधिक लाभ दे सकती है और आय में दोगुनी वृद्धि की संभावनाएं हैं। कार्यशाला में बगीचा विकासखंड के ग्राम बिमडा, दुर्गापाड़ा, कमतर, कुमिकेला और चेडबा से आए 40 से अधिक जनजातीय किसानों सहित कृषि विभाग के 10 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। किसानों को संरक्षण कृषि की मूल अवधारणाएं, धान-परती भूमि प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, मृदा एवं पोषक तत्व प्रबंधन, फसल चक्र और एकीकृत कीट-व्याधि प्रबंधन पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यशाला में बगीचा विकासखंड के ग्राम बिमडा, दुर्गापाड़ा, कमतर, कुमिकेला और चेडबा से आए 40 से अधिक जनजातीय किसानों सहित कृषि विभाग के 10 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। किसानों को संरक्षण कृषि की मूल अवधारणाएं, धान-परती भूमि प्रबंधन, खरपतवार नियंत्रण, मृदा एवं पोषक तत्त्व प्रबंधन, फसल चक्र एवं एकीकृत कीट-व्याधि प्रबंधन पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। उप संचालक कृषि एम. आर. भगत ने कृषि विभाग की योजनाओं की जानकारी दी। उद्यान विभाग के सहायक संचालक करण सोनकर ने उद्यानिकी योजनाओं की जानकारी साझा की। कृषि विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण सुझाव जिला पंचायत सदस्य वेद प्रकाश भगत ने कहा कि नई कृषि तकनीकों को अपनाने से किसानों में खुशहाली आएगी। कृषि महाविद्यालय कुनकुरी के डीन डॉ. अमित कुमार सिन्हा ने रबी फसलों के जल प्रबंधन एवं उतेरा पद्धति पर मार्गदर्शन दिया। रांची केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. एस. के. नायक ने धान-परती भूमि में फसल चक्र अपनाकर आय बढ़ाने की जानकारी दी। डॉ. एस. एस. माली ने सिंचाई तकनीक और पोषक तत्व प्रबंधन पर प्रस्तुतीकरण दिया। कृषि विज्ञान केंद्र जशपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. राकेश भगत ने फसल तीव्रता बढ़ाने पर बल दिया और कहा कि धान कटाई के बाद दलहन-तिलहन की बुवाई से किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी।


