भास्कर न्यूज | बालोद गर्मी सीजन में लक्ष्य शून्य होने के बावजूद धान की खेती को किसान महत्व दे रहे हैं। इसका अंदाजा इसी से लगा सकते है कि जिले में राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में 9 हजार 802 हेक्टयर यानी 24 हजार 505 एकड़ में धान की खेती हो रही है। जबकि कृषि विभाग के रिकॉर्ड में 4 हजार 327 हेक्टेयर यानी 10817.5 एकड़ में धान की खेती हो रही है। दोनों विभाग के आंकड़े में 5 हजार 475 हेक्टेयर रकबे का अंतर है। हालांकि कृषि विभाग की ओर से लक्ष्य 0 तय होने के बावजूद जिले के सभी तहसील, ब्लॉक में किसान धान की खेती कर रहे हैं । इसे विभागीय अफसर भी स्वीकार कर रहे हैं। राजस्व व कृषि विभाग के रकबा आंकड़ा में दोगुना अंतर है। इस संबंध में कृषि विभाग के उपसंचालक जीएस ध्रुर्वे सहित अन्य विभागीय अफसर कुछ कहना नहीं चाह रहे है। वहीं राजस्व विभाग के अफसरों का तर्क है कि पटवारियों, आरआई के माध्यम से भुइंया सॉफ्टवेयर जानकारी, ऑनलाइन रिकॉर्ड, सर्वे रिपोर्ट अनुसार 9 हजार 802 हे. में धान की खेती हो रही है। इस लिहाज से जानबूझकर कृषि विभाग के अफसर यह साबित करना चाह रहे है कि कम रकबे में धान की खेती हो रही है जबकि सच्चाई कुछ और है। राजस्व विभाग के अनुसार तहसीलवार यह स्थिति राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अनुसार बालोद तहसील में 1170 हेक्टेयर, गुंडरदेही तहसील में 1418 हे., गुरूर तहसील में 1594 हे., डौंडी में 1490 हे., डौंडीलोहारा में 312 हे., अर्जुन्दा में 1244 हे. और मार्रीबंगला देवरी तहसील में सबसे ज्यादा 2574 हेक्टेयर में धान की खेती हो रही है। एक हेक्टेयर में 2.50 एकड़ रकबा होता है। आंकड़ों से स्पष्ट हो रहा है कि मार्रीबंगला देवरी तहसील में बालोद, अर्जुन्दा से दोगुना रकबे में धान की खेती हो रही है। वहीं डौंडीलोहारा की तुलना में मार्रीबंगला देवरी तहसील में 8 गुना ज्यादा रकबे में धान की खेती हो रही है। गर्मी में सरकार खरीदती नहीं फिर भी उगा रहे धान रबी सीजन का धान खरीफ की तरह समर्थन मूल्य पर राज्य सरकार नहीं खरीदती बावजूद किसान तत्काल फायदे के चक्कर में धान की खेती को महत्व दे रहे है। जिसका दुष्परिणाम गर्मी भर देखने को मिलता है। जब गर्मी बढ़ती है तब वाटर लेवल 100 से 150 फीट तक डाउन हो जाता है, मोटरपंप से पानी निकलना बंद हो जाता है। इस स्थिति में लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ता है। वर्तमान मंे भी शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति बन रही है। इसके अलावा किसानों को बिजली बंद व लो वोल्टेज की समस्या से भी लोगों को जूझना पड़ रहा है।


