धान: प्रति बोरी 3 किलो तक सूखत, इसकी भरपाई करने समिति प्रबंधकों को नोटिस

भास्कर न्यूज | राजनांदगांव समर्थन मूल्य पर जिले की 74 समितियों के 96 खरीदी केन्द्रों में धान खरीदी की गई। लेकिन खरीदी खत्म होने के 90 दिनों बाद भी जिले के खरीदी केन्द्रों से धान का उठाव नहीं किया गया। तेज धूप और भीषण गर्मी में तेजी से धान सूखने से प्रति बोरी 3 किलो तक सूखत आ रहा है। समिति प्रबंधकों को धान में सूखत की भरपाई करने आदेश जारी किया करने से हड़कंप की स्थिति है। उनका कहना है मिलर्स की हड़ताल व मार्कफेड द्वारा समय पर डीओ एवं टीओ जारी नहीं करने से धान का उठाव नहीं हुआ है। तीनों जिले के समिति प्रबंधकों ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से धान में सुखत की भरपाई राज्य सरकार से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय पर धान के उठाव की जिम्मेदारी शासन प्रशासन की है। समितियां दोषी नहीं है। इसके बाद भी धान के वजन कम होने पर सूखत शॉर्टेज की रिकवरी करने आदेश जारी कर दिया गया है। अब सीएम, खाद्य मंत्री, सचिव से मांग की जाएगी। मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन करेंगे। ज्ञापन सौंपने के दौरान संयुक्त जिलाध्यक्ष ईश्वर श्रीवास, जिला अध्यक्ष किशुन देवांगन, खैरागढ़ जिलाध्यक्ष यशवंत वर्मा, संरक्षक रूप नारायण हिरवानी, प्रकाश भैसारे, महामंत्री संतोष साहू सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। राजनांदगांव. धान में सूखत के मुद्दे पर समिति प्रबंधकों ने विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन। अधिकतर खरीदी केन्द्रों में औसत 500 क्विंटल शेष जिले के अधिकांश खरीदी केन्द्रों में औसत 5 क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ा है। जिसमें तेज धूप और गर्मी से प्रति बोरी 3 किलो तक सूखत आया है। वहीं चूहे, दीमक और मवेशियों के कारण अलग नुकसान हुआ। कुल 1 लाख क्विंटल धान शेष बताया जा रहा है। खाद्य विभाग और डीएमओ द्वारा अब तक धान के उठाव में तेजी लाने का दावा किया जाता रहा है। लेकिन हकीकत में धान का उठाव नहीं हो पाया। वहीं उपार्जन केन्द्रों पहुंचे धान की जेम पोर्टल के माध्यम से ओपन नीलामी की जा रही है। समय पर उठाव नहीं, अब समितियों पर रिकवरी का दबाव, यह अनुचित छत्तीसगढ़ सरकार ने 28 फरवरी तक संपूर्ण धान उठाव का वादा किया था। इसके बाद सूखत की भरपाई सरकार करेगी ऐसा पत्र जारी किया गया। समिति प्रबंधकों के अपने आंदोलन के दौरान सरकार ने उन्हें आश्वासन दिया था वह सूखत की भरपाई करने समिति प्रबंधकों पर दबाव नहीं डालेगी। जिले की 74 समितियों के 96 खरीदी केन्द्रों में 28 फरवरी तक धान खरीदी की गई। खरीदी खत्म होने के बाद आज तक उठाव नहीं हुआ। वजन शॉर्टेज की भरपाई करने नोटिस जारी करना दोष पूर्ण निर्णय है। विधानसभा अध्यक्ष से तीनों जिले के समिति प्रबंधकों ने की विस्तृत चर्चा जिला सहकारी समिति कर्मचारी संघ राजनांदगांव, मोहला-मानपुर, खैरागढ़ संयुक्त जिला के पदाधिकारियों ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से मुलाकात की। उन्होंने मांग करते कहा राज्य सरकार की धान खरीदी नीति अनुसार नवंबर 24 से धान खरीदी 31 जनवरी 2025 तक की गई। लेकिन आज अप्रैल 2025 तक उठाव नहीं हो पाया। तेज गर्मी के कारण धान खुले आसमान के नीचे पड़े रहने से प्रति बोरी में 2-3 किलो वजन कम आ रहा है। जिसके लिए जिला प्रशासन समिति प्रबंधक को दोषी ठहरा कर नोटिस जारी कर रहा है। जानिए, विगत वर्ष रिकवरी के नाम पर एफआईआर भी दर्ज कराए थे समिति प्रबंधकों का कहना है कि विगत वर्षों में सूखत की रिकवरी करने शासन द्वारा समिति प्रबंधकों पर एफआईआर दर्ज कराया गया। उन पर दबाव डाल कर शार्टेज की रिकवरी की गई। मानसिक प्रताड़ना के चलते हृदयाघात से समिति प्रबंधकों की मौत तक हो गई। इसे ध्यान में रख समिति प्रबंधकों ने विगत खरीफ सीजन से पहले आंदोलन कर समितियों से सूखत की भरपाई नहीं कराने की मांग पर आंदोलन किया था। लिखित आश्वासन पर उन्होंने खरीदी की। लेकिन फिर से रिकवरी का दबाव बनाया जा रहा है।

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