धार जिले के सरदारपुर जल संसाधन उपसंभाग कार्यालय पर पिछले एक साल से गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। विभाग पर बिना टेंडर प्रक्रिया के लगभग 36 लाख रुपये का ‘पीस वर्क’ कराने का आरोप है, जिससे सरकार को लाखों का नुकसान हुआ है। इसी लापरवाही के चलते वर्ष 2024 में मौलाना तालाब फूट गया, जिसमें सैकड़ों बीघा फसलें बर्बाद हो गईं। मौजूदा स्थिति यह है कि किसान और स्थानीय लोग उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
वर्ष 2025 में मौलाना तालाब की मरम्मत का काम भी बिना निविदा प्रक्रिया के कराया गया। इसमें करीब 36 लाख रुपये का ‘पीस वर्क’ हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर टेंडर से काम होता तो लागत में लगभग 40 प्रतिशत की बचत हो सकती थी। इससे सरकार को सीधे तौर पर करीब 14 लाख रुपये का नुकसान हुआ। तालाबों की हालत
उपसंभाग क्षेत्र में कुल 62 सिंचाई तालाब हैं। पिछले एक साल में मौलाना तालाब, चुनार तालाब और इंदिरा गांधी तालाब विभागीय लापरवाही से क्षतिग्रस्त हुए या फूटने की कगार पर पहुंच गए। मौलाना, इंदिरा गांधी तालाब और गोविंदपुरा क्षेत्र में कराए गए ‘पीस वर्क’ की गुणवत्ता पर भी सवाल उठे हैं।
मौलाना तालाब फूटने का कारण
मौलाना तालाब की मरम्मत में निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं हुआ। काली मिट्टी का उपयोग नहीं किया गया। पाल की उचित दबाई भी नहीं की गई। इससे तालाब में दरारें पड़ गईं और अंततः तालाब फूट गया। इससे आसपास सैकड़ों बीघा फसलें बर्बाद हो गईं।
विभागीय अधिकारी की प्रतिक्रिया
इस मामले में जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री मानसिंह चौहान से संपर्क करने की कोशिश की गई। लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनसे कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। किसानों और स्थानीय निवासियों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की है।


