धार में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज के भूमिपूजन कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। 23 दिसंबर को प्रस्तावित इस कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि कॉलेज की जमीनी तैयारियां अब भी अधूरी हैं। कांग्रेस जिला प्रवक्ता अजय सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रस्तावित भूमि का सर्वे पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा, संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमतियां भी नहीं ली गई हैं और मेडिकल कॉलेज की कोई ठोस योजना भी सामने नहीं आई है। ठाकुर ने कहा कि जनवरी 2023 में विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज की घोषणा की गई थी। अक्टूबर 2023 में सभी कागजी कार्रवाई पूरी होने का दावा किया गया था। 268 करोड़ रुपए की लागत से दो वर्षों में कॉलेज निर्माण की बात कही गई थी, लेकिन 2024 में लगभग 3 करोड़ रुपए खर्च कर केवल बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया गया। जमीन पर निर्माण की अनुमति नहीं थी
उन्होंने यह भी बताया कि जिस भूमि पर मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित है, वह कंजर्वेशन (संरक्षित) भूमि है, जहां निर्माण की अनुमति नहीं थी। कांग्रेस के अनुसार, बिना जांच-पड़ताल और राजनीतिक दबाव में भूमि आवंटन किया गया, जो जनता को गुमराह करने जैसा है। कांग्रेस जिला प्रवक्ता ने बताया कि जबलपुर स्तर पर अनुमति की फाइल अटकी होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज को पीपीपी मोड पर देने की घोषणा कर दी गई। जिस संस्था को निर्माण का जिम्मा सौंपा गया है, उसके इंजीनियरों के अनुसार, भूमि का सर्वे अभी भी बाकी है और योजना तैयार होनी शेष है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भूमि ऊबड़-खाबड़ है, कैचमेंट एरिया में आती है, भूमि हस्तांतरण अधूरा है और वन विभाग सहित अन्य विभागों की अनुमति बाकी है, तो ऐसे में 23 दिसंबर को प्रस्तावित भूमिपूजन केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा। अंत में, कांग्रेस जिला प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की कि पहले सभी विभागीय और कानूनी अड़चनें दूर की जाएं। इसके बाद निर्माण की स्पष्ट समय-सीमा घोषित की जाए और तभी भूमिपूजन किया जाए, ताकि धार जिले की जनता को वास्तविक लाभ मिल सके।


