जोधपुर में 565 साल पुरानी धींगा गवर उत्सव शुरू हो चुका है, जहां भीतरी शहर की प्रमुख गलियों में मातृ शक्ति का राज दिखाई दे रहा है। शहर की आस्था से जुड़े इस परंपरागत उत्सव में तिजणियों के समूह जगह-जगह पर स्थापित गवर माता के दर्शन-पूजन कर रही हैं। इनमें मुख्य रूप से हाथी चौक, चाचा की गली, सुनारों की घाटी, सुनारों का बास, आडा बाजार, ब्रह्मपुरी, जूनी मंडी, पुंगलपाड़ा, जालप मोहल्ला, कबूतरों का चौक, खांडा फलसा सहित तकरीबन 40 से अधिक स्थानों पर गवर माता विराजित हैं। स्वर्णाभूषणों से लकदक गवर माता भीतरी शहर में विराजित गवर माता की प्रतिमाओं पर लाखों रुपए के स्वर्णाभूषण सुशोभित हो रहे हैं। इनमें सुनारों की घाटी गवर माता ने तो करीब 15 किलो वजनी स्वर्णाभूषण धारण किए हैं, वहीं सुनारों का बास में गवर माता ने 11 किलो सोने के जेवरात धारण किए हुए हैं। कमोबेश यही स्थिति शहर में अन्य स्थानों पर विराजित गवर माता प्रतिमाओं की है। इन सभी स्थानों पर आकर्षक रोशनी से अलग ही छटा बिखरती नजर आ रही है।


