समाज में आज भी नवजन्मी बच्चियों को लावारिस छोड़ने की घटनाएं पुत्र मोह की गहरी मानसिकता को दर्शाती हैं। हालांकि, कुछ संस्थान ऐसी बच्चियों को अपना कर उनकी देखभाल में मिसाल पेश कर रहे हैं। ये संस्थान न केवल उनकी परवरिश करते हैं, बल्कि उन्हें प्यार और सम्मान से भरा जीवन देने का कार्य कर रहे हैं। इन संस्थानों ने दिखा दिया है कि बेटियां समाज की संपत्ति हैं और उन्हें अपनाने से उनकी जिंदगी बदली जा सकती है। हर फेस्टिवल को बच्चों के साथ मनाने और उन्हें बेहतर भविष्य देने का यह प्रयास समाज के लिए प्रेरणादायक है। यह प्रयास इस संदेश को मजबूत करता है कि बेटियां केवल परिवार का हिस्सा नहीं, बल्कि समाज की शक्ति हैं। समाज में बदलाव लाने के लिए इन संस्थानों का समर्थन और उनकी प्रेरणा को आगे बढ़ाना जरूरी है। कभी आपने लोहड़ी इन बेटियों के नाम मनाई है? आइए एक सकारात्मक शुरुआत करें। श्री बालाजी प्रेम आश्रम: 60 बच्चों में से 40 लड़कियां कुलवंत भल्ला द्वारा 2008 में स्थापित श्री बालाजी प्रेम आश्रम और निखिल विद्यालय ने शुरुआत में 30 बच्चों के साथ कार्य किया था। ये संस्थान पूरी तरह से ऑनलाइन सिस्टम पर काम करता है और सरकारी मानकों का पालन करता है। अब तक हजारों गुमशुदा बच्चों को उनके परिवारों तक पहुंचाया गया है। इस संस्थान में 350 बच्चों के लिए एक स्कूल है, जिसमें 160 लड़कियां फ्री पढ़ाई हेवेनली एंजल : 48 लड़कियों का यही है घर धाम तलवंडी खुर्द बालघर : 45 लड़कियां रहतीं कर रही हैं। बच्चों को हर सुविधा दी जाती है। हॉस्टल में 60 बच्चे रहते हैं, जिनमें 40 लड़कियां हैं। हाल ही में एक 20 वर्षीय लड़की की शादी कराई गई। संस्थान से संपर्क करने के लिए 9501010008 नंबर डायल करें। संस्थान से 9814508488, 9779400032 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। संस्थान से मोबाइल नंबर 9216666644 पर संपर्क करें। यूएसए बेस्ड अनिल मोंगा द्वारा 2017 में शुरू किए गए हेवेनली एंजल ने एक छोटे से प्रयास के रूप में शुरुआत की थी। तब यहां सिर्फ दो बच्चे थे, लेकिन आज यह 101 बच्चों का बड़ा परिवार बन चुका है, जिसमें 48 लड़कियां शामिल हैं। यहां बच्चों को हर प्रकार की सुविधा, शिक्षा, और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाती हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर और खुशहाल जीवन जी सकें। स्वामी गंगानंद भूरीवाले ट्रस्ट द्वारा संचालित एसजीबी बाल घर धाम, तलवंडी खुर्द, लुधियाना, 2003 से बेआसरा बच्चों को संभाल रहा है। इस अनाथालय की शुरुआत तीन बच्चों से हुई थी। इस समय यहां पर 60 बच्चे हैं जिनमें से 45 लड़कियां हैं। संस्थान की बीबी जसबीर कौर और कुलदीप सिंह मान ने इसे बच्चों के लिए एक परिवार जैसा माहौल दिया है।


