सोनू कुमार | गढ़वा जिले के धुरकी प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रारंभिक जांच शुरू किए जाने के बाद से पूरे अस्पताल परिसर और कर्मियों में हड़कंप मचा हुआ है। शुक्रवार को इस मामले से जुड़े तीन महत्वपूर्ण पदाधिकारियों, सीएचसी प्रभारी डॉ. रत्नेश कुमार एवं दो अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को गढ़वा एसीएमओ कार्यालय में स्पष्टीकरण हेतु बुलाया गया था। परन्तु सभी ने जांच अधिकारी से दो दिन का अतिरिक्त समय लेकर जांच को और पेचीदा बना दिया है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, सीएचसी धुरकी में पिछले कई महीनों से जन्म प्रमाणपत्र निर्गमन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं देखी जा रही थीं। बिना उचित दस्तावेजों के प्रमाणपत्र जारी करना, जन्म रजिस्टर में गलत प्रविष्टियां, अभिलेखों का गायब होना और डिजिटल रिकॉर्ड में हेरफेर जैसे आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के प्रकाश में आते ही एसीएमओ स्तर से विस्तृत जांच की शुरुआत की गई। शुक्रवार को जब तीनों संबंधित अधिकारियों को एसीएमओ कार्यालय तलब किया गया, तो उम्मीद की जा रही थी कि वे सभी कागजात और डिजिटल रिकॉर्ड के साथ उपस्थित होंगे। लेकिन, एसीएमओ डॉ. आर.एस. सिंह के समक्ष पहुंचकर उन्होंने कहा कि कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और रजिस्टर उनके पास उपलब्ध नहीं हैं, जिन्हें तैयार करने में समय लगेगा। इस पर उन्होंने जांच अधिकारी से दो दिन का समय देने का अनुरोध किया, जिसे स्वीकार कर लिया गया। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी देते हुए सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने बताया कि विभाग पूरे मामले को अत्यधिक गंभीरता से देख रहा है। उन्होंने कहा कि जन्म प्रमाणपत्र जैसी संवेदनशील सेवा में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न केवल सरकारी रिकॉर्ड को प्रभावित करती है, बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों से भी सीधे तौर पर खिलवाड़ करती है। इसलिए इस मामले की जांच सावधानी, पारदर्शिता और कठोरता के साथ की जा रही है।


