भास्कर संवाददाता | बड़वानी मनमाड़-इंदौर रेलवे परियोजना के अंतर्गत भूमि अधिग्रहण में सबसे अधिक प्रभावित लोगों की संख्या महाराष्ट्र के धूलिया जिले में सामने आई है। धूलिया तहसील के लडिंग गांव में कुल 1061 लोगों की जमीन का अधिग्रहण किया गया है। जो इस परियोजना में किसी एक गांव में अब तक का सबसे बड़ा अधिग्रहण माना जा रहा है। यहां तक की ग्राम पंचायत भवन भी अधिग्रहण में आ गया है। इसी तरह जिले में भी रेलवे का काम तेजी से पूरा करने की मांग की गई है। मनमाड़-इंदौर रेलवे परियोजना को लेकर महाराष्ट्र में सबसे अधिक चर्चा धूलिया क्षेत्र की ही रही है। इसका प्रमुख कारण यह रहा कि यहीं से रेल मार्ग के लिए सबसे पहले आंदोलन की शुरुआत हुई। बापू चौरे, मदन मिश्रा और साकला जैसे लोगों ने खंडेराव बाजार रेल समिति का गठन कर इस पुनीत काम की नींव रखी। इसके बाद धूलिया के पूर्व विधायक अनिल गोटे ने आंदोलन को और तेज कर इसे व्यापक स्तर पर चर्चा में ला दिया। इस आंदोलन का दूसरा प्रमुख केंद्र सेंधवा रहा। जहां खंडेराव बाजार समिति के साथ मिलकर रेलवे संघर्ष समिति बनाई गई। यहां से मनोज मराठे ने आंदोलन का नेतृत्व किया और इस परियोजना से जुड़े तथ्यों को जनहित याचिका के माध्यम से सरकार और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया यह परियोजना क्यों और कैसे जरूरी है। इसके चलते कई बार सर्वे किए गए। कई कमियां और परेशानियां सामने आईं। जिन्हें न्यायालय के निर्देशानुसार पूरा किया गया। रेलवे ने इस मार्ग को 8 प्रतिशत लाभकारी बताया जा रहा था। मराठे के प्रयासों से कोर्ट में इसे 18 से 20 प्रतिशत लाभकारी सिद्ध किया। इसके बाद परियोजना को मंजूरी मिली।


