धूल और शोर से एक लाख लोग परेशान:धूल से ढका बोरियाकला, हर दूसरे घर में सांस का मरीज आधा इलाका खाली क्योंकि अफसरों ने आंखें बंद कर लीं

शदाणी दरबार के सामने बोरियाकला हाउसिंग बोर्ड की बड़ी कालोनी पिछले ढाई साल से कांक्रीट मिक्सर प्लांट की धूल के आवरण में ढकी रहती है। यहां के लोगों ने मार्निंग-इवनिंग वॉक छोड़ दी है। करीब एक हजार पेड़-पौधे सूख गए हैं। कॉलोनी के हर दूसरे घर में आंख, सांस और कान के मरीज मिल रहे हैं। कई लोग घर छोड़कर दूसरे इलाके में किराए पर रहने लगे हैं। रिश्तेदारों ने आना बंद कर दिया है।
हालत यह है कि 2600 घरों की यह कॉलोनी आधी खाली हो चुकी है। वजह एक है कि शहर के इस पॉश इलाके में बड़ा कांक्रीट मिक्सर प्लांट लगा हुआ है। यह 24 घंटे चलता रहता है। जिसकी वजह से गिट्टी, रेत, सीमेंट से भरे ट्रक भी दिन रात यहां आते हैं। जब प्लांट चलता है तो सीमेंट और रेत के पार्टिकल उड़कर कई मीटर दूर तक घर में पहुंच जाते हैं। रहवासियों ने कलेक्टर से लेकर पर्यावरण संरक्षण मंडल तक को औसतन हर महीने चिट्‌ठी लिखी है। कोंडागांव विधायक लता उसेंडी तक ने इस मामले को विधानसभा में उठाया, तब एक बार इसे बंद भी किया गया। लेकिन कुछ दिनों बाद पर्यावरण के अफसरों की मिलीभगत से यह प्लांट फिर शुरू हो गया। सारे प्रयास फेल होने के बाद अब लोग सड़क पर उतर आए और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। अधिकारी और जनप्रतिनिधि नहीं निभा रहे अपनी-अपनी जिम्मेदारी प्रकाश राबड़े, क्षेत्रीय अधिकारी, पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण विभाग जिम्मेदारी- प्रदूषण को रोकना
जवाब- 4 बार कॉल मैसेज करने के बाद भी जवाब नहीं मिला। तब सदस्य सचिव पी अरुण प्रसाद से बात की गई। उन्होंने कहा कि मुझे लोकेशन, नाम और फोटो भेजिए मैं चेक करवाता हूं। अगर नियम के तहत प्लांट नहीं होगा तो कार्रवाई होगी। माधवी वर्मा, पूर्व सरपंच (तत्कालीन), बोरियाकला जिम्मेदारी- प्लांट की अनुमति को रोकना
जवाब- जिस समय प्लांट लग रहा था उस समय हमसे एनओसी के लिए पत्र आया था। तब रहवासियों की ओर से कोई आपत्ति नहीं की गई थी। इस प्लांट के लिए पंचायत से भी दबाव था। इसलिए मैंने इन्हें अनुमति प्रदान कर दी। नंद कुमार चौबे, एसडीएम, रायपुर जिम्मेदारी-रहवासी क्षेत्र में लगे प्लांट की जांच करना
जवाब- इस संबंध में शिकायत हमारे पास तो नहीं आई है, हो सकता है कलेक्टर कार्यालय में रहवासियों ने शिकायत की हो। प्लांट नियम के तहत चल रहा या नहीं यह देखना खनिज विभाग की जिम्मेदारी है। नियम के तहत नहीं है तो कार्रवाई होगी।

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