धोखाधड़ी का मामला:15 साल पहले आदिवासी को बेची जा चुकी जमीन को धोखे से अन्य आदिवासी को दोबारा बेचा, छगन दलाल ने सबको ठगा

उदयपुर शहर के पास भुवाणा में जमीन हड़पने और करोड़ों की धोखाधड़ी के चर्चित प्रकरण में सुखेर थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी जमीन दलाल छगनलाल को गिरफ्तार कर लिया। छगनलाल पर आरोप है कि उसने आदिवासी की एक ही जमीन को दो बार बेचकर न केवल मूल खरीदार, बल्कि नए खरीदार और जमीन मालिकों को भी ठगा। मामले के अनुसार जैसलमेर निवासी गुमानाराम भील ने वर्ष 2010 में कीकाराम मीणा से खसरा नंबर 1961 की कृषि भूमि 12.51 लाख रुपए में खरीदने का इकरारनामा किया। गुमानाराम ने 10.51 लाख रुपए का भुगतान कर जमीन पर कब्जा भी ले लिया था। इसी बीच मालिक कीकाराम मीणा की मृत्यु हो गई और जमीन का रिकॉर्ड उनके वारिस पत्नी कूकीबाई और बच्चों के नाम आ गया। छगनलाल की रिश्तेदारी कीकाराम के पैतृक गांव (कागरदा, पाली) में थी। उसे पता था कि जमीन पहले बिक चुकी है। यहीं से छगनलाल ने ठगी का जाल बुना। उसने वारिसों को लालच दिया कि रिकॉर्ड में नाम होने से वे इसे दोबारा बेच सकते हैं। आरोप है कि छगनलाल ने चित्तौड़गढ़ के गोपाल भील से तथ्य छिपाकर 2 करोड़ में उस जमीन का सौदा तय कर दिया। 19 अक्टूबर 2025 को कीकाराम के वारिसों के माध्यम से गोपाल भील के नाम रजिस्ट्री भी करवा दी। छगनलाल ने दोनों पक्षों से रकम वसूली, 48 लाख लेने की पुष्टि पुलिस के मुताबिक- बैंक ट्रांजैक्शन से खुलासा हुआ है कि छगनलाल ने इस सौदे में दोनों पक्षों से अवैध वसूली की है। गोपाल भील से अपने भाई रामाराम के खाते में 30 लाख रुपए डलवाए थे। कीकाराम के बेटे चम्पाराम से भी 18 लाख रुपए वसूल किए। कुकीदेवी द्वारा छगनलाल के कहने पर गोपाल को जमीन बेचने की जानकारी मिली तो गुमानाराम ने विधायक पुष्पेंद्र सिंह से भी कुकीदेवी को समझाने का आग्रह किया। पुलिस छगनलाल के संपर्क, समर्थक और इसके साथ लेनदेन में शामिल अन्य लोगों के संबंध में जांच कर रही है। दूसरी तरफ छगनलाल, कूकी बाई ने भी विधायक पुष्पेंद्र सिंह व अन्य लोगों के खिलाफ परिवाद दायर किया है। उधर, जमीन खरीदने वाले गोपाल भील ने धोखे से बेची गई जमीन की रजिस्ट्री निरस्त करवाई और छगनलाल समेत 15 के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज करवाया। रजिस्ट्री निरस्त के बाद कीकाराम के वारिसों ने खरीदार गुमानाराम के नाम दुबारा रजिस्ट्री करवाई है।

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