धौलपुर में नए साल पर हुआ कवि सम्मेलन:विकल फर्रुखाबादी को ‘साहित्य भूषण’ से किया सम्मानित

धौलपुर में चंबल कला एवं साहित्य संस्थान की ओर से नव वर्ष के उपलक्ष्य में गुरुवार को एक कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार विकल फर्रुखाबादी को ‘साहित्य भूषण’ सम्मान से नवाजा गया। सम्मेलन में देश के नामचीन कवियों ने राजनीति, भ्रष्टाचार, श्रृंगार और ओज सहित विभिन्न विषयों पर काव्य पाठ किया। कवि सम्मेलन का आयोजन एक निजी स्कूल में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत में चंबल कला एवं साहित्य संस्थान के अध्यक्ष प्रदीप कुमार वर्मा और अन्य पदाधिकारियों ने आमंत्रित कवियों व अतिथियों का माला पहनाकर और प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कवि बाबूलाल सागर ने मां शारदे की वंदना के साथ सम्मेलन का आगाज किया। भरतपुर से आईं कवयित्री प्रिया शुक्ला ने नारी सम्मान और राष्ट्र में नारी की स्थिति पर अपनी प्रतिनिधि रचना “रिश्तों की पावन डोर में गुथी हुई एक माला हूं मैं…” प्रस्तुत की। उन्होंने श्रृंगार रस के कई मनोहारी छंद और मुक्तक भी सुनाए, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वरिष्ठ कवि एवं गीतकार विकल फर्रुखाबादी ने सम्मेलन का संचालन करते हुए अपनी रचना “तुम मेरे स्वच्छ मन से मिलो तो सही, राधिका बनकर तुम्हारे कदम चूम लूं…….” सुनाई, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा। शिक्षाविद वीरेंद्र त्यागी ने सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए अपनी रचना “हम आवारा स्वर” प्रस्तुत की। डॉ. राकेश दीक्षित ने श्रृंगार रस की रचना “तुम्हारी प्रीत में पल-पल संवरते जा रहे हैं हम” सुनाई, जबकि कवि राम पटसारिया ने मां की महिमा पर “दिल मेरा रोना चाहता है, जब कोई मां की बात करता है” प्रस्तुत की। इस अवसर पर कवयित्री नंदिनी शर्मा ने श्रृंगार रस, आकाश परमार ने धौलपुर की संस्कृति, प्रेम प्रसून ने भगवान श्रीराम की महिमा, प्रेम शंकर करेला ने वंदेमातरम, श्रीराम गोस्वामी ने श्रृंगार और बाड़मेर के कवि योगेंद्र रघुवंशी ने भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए काव्य पाठ किया।

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