छत्तीसगढ़ सरकार ने नई ट्रांसफर पॉलिसी जारी कर दी है। इसके मुताबिक पुलिस, आबकारी, खनिज, परिवहन, वाणिज्यकर, पंजीयन तथा स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत शिक्षकीय कार्य में पदस्थ शिक्षकों के तबादले नहीं होंगे। निगम, मंडल और आयोगों में पदस्थ कर्मचारियों को भी इससे अलग रखा गया है। खास बात यह है कि तबादला आदेश जारी होने के बाद उसमें संशोधन या निरस्तीकरण सिर्फ मुख्यमंत्री की मंजूरी से ही किया जा सकेगा। तबादलों से जिन विभागों को दूर रखा गया है उनके कर्मचारियों की संख्या करीब 3.6 लाख है। प्रदेश में करीब 5 लाख कर्मचारी हैं। इस तरह करीब 70 प्रतिशत कर्मचारी तबादले का लाभ नहीं ले पाएंगे। तबादलों के लिए 6 जून से 13 जून तक आवेदन करना होगा, जबकि तबादले 14 जून से 25 जून तक किए जाएंगे। जिला स्तर पर तबादले प्रभारी मंत्री तो प्रदेश स्तर पर विभागीय मंत्री की मंजूरी से किए जा सकेंगे। बताया गया है कि जिला स्तर पर तृतीय श्रेणी तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादले प्रभारी मंत्री की मंजूरी से कलेक्टर द्वारा किये जा सकेंगे। इस दौरान कलेक्टर यह देखेंगे कि स्थानांतरण किये जाने वाले पद जिला संवर्ग का है तो उनका स्थानांतरण जिले के अंदर ही हो तथा स्थानांतरण आदेश तद्नुसार प्रसारित होंगे। विभाग के जिला कार्यालय प्रमुख द्वारा तबादले का प्रस्ताव कलेक्टर को भेजा जाएगा। अन्य खास बातें:
– 1 जून 2025 की स्थिति में एक साल से कम पदस्थ अधिकारी / कर्मचारियों के तबादले नहीं होंगे।
– सुकमा, बीजापुर एवं नारायणपुर में पदस्थ अधिकारियों / कर्मचारियों के तबादले तभी होंगे जब वहां दो तिहाई पद भरें हों।
– ज्यादा कर्मचारी वाले स्थानों से कम कर्मचारी वाले स्थानों पर भेजे जाएं
– तबादला आदेश में संशोधन या निरस्तीकरण सीएम की मंजूरी के बाद ही हो सकेगा।
– जिलों की जनसंख्या, ब्लॉकों की संख्या, विभाग के जिलों में कार्यभार के अनुरूप अधिकारी / कर्मचारियों का संतुलन हों।
– कैंसर या अन्य गंभीर बीमारी जिसमें नियमित जांच जरूरी है उन्हें जिला मेडिकल बोर्ड की अनुशंसा पर जहां चाहें वहां भेजा जा सकता है।
– जिन कर्मचारियों के पति- पत्नी एवं पुत्र-पुत्री मानसिक निःशक्तता, ऑटिज्म अथवा बहुआयामी निशक्तता से पीड़ित हैं को स्वयं के व्यय पर ऐसी जगह पर पदस्थापना करने के संबंध में विचार किया जा सकेगा, जहां निशक्तता से पीड़ित का उपचार एवं पुत्र / पुत्री को शिक्षा सुलभ हो सके।
– सभी श्रेणी के शिक्षकों के तबादले नहीं होंगे क्योंकि उनका युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है।
– पत्नी / पति को प्रशासकीय सुविधा एवं जनहित को ध्यान में रखते हुए एक ही स्थान पर पदस्थ किया जा सकता है।
– जिला कैडर के कर्मचारियों का स्थानांतरण जिले के भीतर एवं संभाग कैडर के
कर्मचारियों का स्थानांतरण संभाग के अंतर्गत ही संभव होगा किस श्रेणी के कितने तबादले राज्य स्तर पर प्रथम- द्वितीय श्रेणी के 15 तो तृतीय-चतुर्थ में 5% तबादले: राज्य स्तर पर प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के अधिकारियों के संवर्ग में अधिकारियों की कुल संख्या का अधिकतम 15 फीसदी तथा तृतीय श्रेणी एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के मामलों में अधिकतम 5 फीसदी तक स्थानांतरण किये जा सकेंगे। परस्पर सहमति से स्वयं के व्यय पर किये गए तबादलों की गणना उक्त सीमा हेतु नहीं की जाएगी। इसी तरह जिला स्तर पर तृतीय श्रेणी में 10 तो चतुर्थ श्रेणी में 15 फीसदी तक तबादले किए जा सकेंगे। शहरी क्षेत्रों में रिक्तियां: यदि अनुसूचित क्षेत्र से कोई गैर अनुसूचित क्षेत्र में तबादला चाहता है तो प्रस्ताव में उनके एवजीदार का भी प्रस्ताव ( जो गैर अनुसूचित क्षेत्र से हो) अनिवार्यतः रखा जाए। कलेक्टर यह तय करेंगे कि यथा संभव अनुसूचित क्षेत्र के रिक्त पद भरे जाएं। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्तियों को बैलेंस करने का विशेष ध्यान रखा जाए। यानी ग्रामीण क्षेत्र में जितने प्रतिशत पद रिक्त हैं। तबादलों के विरुद्ध शिकायत 15 दिन के भीतर: तबादलों के संबंंध में कोई भी शासकीय सेवक सिर्फ नियमों का उल्लंघन होने पर ही शिकायत कर सकेगा। ऐसे मामलों में उसे 15 दिनों में तबादला करना होगा। यह शिकायत वरिष्ठ सचिवों की समिति के संयोजक व जीएडी सचिव को प्रस्तुत किया जा सकेगा। परस्पर सहमति या स्वयं के व्यय पर तबादला इस नीति में शामिल नहीं
कलेक्टर द्वारा परीक्षण करने के बाद प्रभारी मंत्री का अनुमोदन लेकर ही तबादला आदेश जारी किया जाएगा। पद खाली होने पर उसी पद के समकक्ष अधिकारी की पदस्थापना की जाएगी। इस तरह का प्रभार कनिष्ठ अधिकारी को न दिया जाए। स्वयं के व्यय पर किया गया तबादला परस्पर सहमति से किए गए स्थानांतरण की श्रेणी में नहीं आएगा। सहमति के आधार पर तबादला भी दो साल या उससे अधिक अवधि से पदस्थ कर्मचारियों के लिए लागू होगा। जिनकी रिटायरमेंट एक साल से कम बची हो उनका जीएडी के निर्देशों के मुताबिक तबादला किया जाएगा। गंभीर शिकायतों के मामले में दो साल से कम अवधि में तबादला किया जाना आवश्यक हो तो प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाये जाने पर ही तबादले किए जाएंगे।


