राजस्थान बेडमिंटन के पूर्व अध्यक्ष ने उदयपुर में कहा कि राजस्थान में नए ओलंपिक संघ को मान्यता देना खिलाडिय़ों के हितों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि दोनों एसोसिएशनों को साथ लेकर भारतीय ओलम्पिक संघ (आईओए) साझा समाधान निकाले। उदयपुर में आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व अध्यक्ष एवं उदयपुर ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष सुधीर बक्षी ने कहा कि स्व. जनार्दनसिंह गहलोत के स्वर्गवास के बाद यह स्थिति पैदा हुई जिसमें राजस्थान ओलिंपिक एसोसिएशन में एक नई एसोसिएशन बना दी गई। उसी दौर में गहलोत के साथ जो पिछले 20 से 30 वर्षों से साथ थे, उन लोगों ने काफी समझाने की कोशिश की लेकिन कुछ लोग नहीं माने और उन लोगों ने दूसरी नई एसोसिएशन बना ली। उन्होंने कहा कि इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने प्रमाण पत्र दिया जिसका तात्पर्य यह रहा कि आप ही राजस्थान में ओलंपिक एसोसिएशन के कार्य को देखते हुए उनका प्रतिनिधित्व करेंगे। बक्षी ने कहा कि कुछ दिन पहले इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने फिर एक बार अनिल व्यास वाली ओलंपिक संघ एसोसिएशन की बजाए अध्यक्ष तेजस्वीसिंह गहलोत और महासचिव सुरेंद्रसिंह गुर्जर वाली एसोसिएशन को मान्यता दे दी व वेबसाइट पर अनिल व्यास और रामअवतार जाखड़ की जगह उनका नाम दर्ज कर दिया गया। बक्षी ने कहा कि जिस एसोसिएशन का विधिवत खुद इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन ने चुनाव कराया उसी की वैधानिक खत्म करते हुए दूसरे गुट को अधिकार देना खेलों के सितारे गर्दिश में लाना और खेलों में एक डर भावना पैदा करने जैसा कदम है। यह समझ से परे है। वे बोले कि हमारा अपना मनाना है कि अगर भारतीय ओलिंपिक एसोसिएशन एक साथ मिलकर अच्छा प्रदर्शन करे, आपसी सामंजस्य से काम करे व खेलों को प्राथमिकता में सर्वोपरि रखें तो उचित होगा। ओलंपिक संघ अगर दोनों संघों में समझौता कराते हुए साझा प्रयासों के साथ काम करे तो वह ज्यादा बेहतर होगा। बजाय इसके कि मान्यताओं को बदलते हुए कभी इसे तो कभी उसे मान्यता प्रदान करे। इससे जो बच्चे खेल रहे हैं उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा जो किसी भी दृष्टि से उचित नहीं होगा। कोषाध्यक्ष आर. के धाभाई ने बताया कि जो कुछ अभी घटित हुआ है यह भी कानून के विरूद्ध है इस अवसर पर सेक्रेटरी हेमराज सोनवाल ने भी अपनी बात रखी।


