अमृतसर | नए साल की शुरुआत भले ही कड़ाके की सर्दी और धुंध से हुई लेकिन इससे बेफिक्र लोग श्री दरबार साहिब में दर्शन-दीदार को उमड़ पड़े। बाहर भले ही हाड़ को हिला देने वाली ठिठुरन थी लेकिन संगत पावन सरोवर में उल्लास और आस्था के साथ स्नान करती नजर आ रही थी। 31 दिसंबर से लेकर पहली तारीख की देर रात तक संगत का सैलाब उमड़ा रहा। गुरु नगरी के निवासियों के साथ-साथ देश-विदेश से आई संगत भी नए साल के आगाज पर पहुंची हुई थी। 31 दिसंबर की सुबह से ही श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंच रहे थे। रात 9 से 12 बजे के बीच संख्या में और इजाफा हो गया। हालांकि 30 दिसंबर के बंद का असर भी रहा लेकिन वह नए साल वाले दिन तक आते-आते खत्म हो गया। स्थिति यह थी कि पैर रखने तक की जगह नहीं थी। परिक्रमा में तो पैदल चलने में भी मुश्किल रही थी। परिक्रमा में चारों तरफ श्रद्धालु ही श्रद्धालु नजर आ रहे थे। लोग जहां जगह मिली वहीं बैठ गए और रात 12 बजने का इंतजार करते हुए नाम का जाप करते नजर आए। जैसे ही 12 बजे पूरा परिसर जो बोले सोनिहाल के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद जब कपाट बंद हुए तो भी लोगों का जमावड़ा बना रहा। फिर तड़के दर्शन-दीदार का सिलसिला शुरू हो गया। भीड़ इतनी ज्यादा थी कि लंगर हॉल के पीछे बने नए कमरों को भी खोलना पड़ा। जितने श्रद्धालु हॉल के अंदर मौजूद थे, उतने ही बाहर भी इंतजार कर रहे थे, लेकिन सेवा में कहीं कोई कमी नहीं दिखी। रात को हॉल के दूसरी तरफ नए साल पर बनने वाले लंगर की सेवा भी चल रही थी। यही हाल गुरु के लंगर में भी था। खैर, हर कोई दर्शन-दीदार करके वाहे गुरु से नए साल में सलामती और खुशहाली की अरदास कर रहा था। संगत को मैनेज करने के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने पुख्ता बंदोबस्त किए थे। दर्शन करने आए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी जा सकती थीं। ठंड और घने कोहरे के बावजूद सचखंड श्री दरबार साहिब में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई।


