मेट्रो ट्रेन का कमर्शियल रन जनवरी से सुपर कॉरिडोर पर करने की तैयारी की जा रही है, लेकिन मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन एक उलझन में फंस गई है। गांधी नगर से टीसीएस तक 6 किमी के जिस पार्ट पर मेट्रो को पहले चरण में चलाया जाएगा, वहां अभी यात्री मिलने की कोई संभावना ही नहीं है। जिस हिस्से में मेट्रो दौड़ेगी, वहां आसपास न बसाहट है, न व्यावसायिक गतिविधियां। न केवल जनवरी में, बल्कि अगले साल-डेढ़ साल भी यहां कोई बहुत ज्यादा यात्री मिलने की उम्मीद नहीं है। बस मेट्रो शुरू हो गई है, इस सुकून के साथ यहां मेट्रो ट्रेन चलती रहेगी। इंदौर में मेट्रो रेल का 31 किमी का सर्कल बनना है, जो गांधी नगर, सुपर कॉरिडोर से सुखलिया, विजय नगर, रेडिसन, बंगाली, पलासिया, राजबाड़ा होते हुए पुन: गांधी नगर पर खत्म होगा। अभी 17.5 किमी हिस्से में काम हो रहा है। मेट्रो ने यात्रियों का जो सर्वे किया है, उसके मुताबिक, 31 किमी का प्रोजेक्ट पूरा होने पर हर दिन 3.50 लाख टिकट बिक्री होगी। जिस रूट पर वह मेट्रो शुरू करने जा रहा है, वह केवल औपचारिकता ही रहेगी, क्योंकि गांधी नगर से टीसीएस तक आवाजाही करने वाले यात्री नगण्य हैं। यहां सिटी बस, ऑटो रिक्शा या ई रिक्शा भी नहीं चलते, क्योंकि यहां यात्रियों की कोई डिमांड ही नहीं है। क्योंकि… 11 किमी में काम अधूरा, इसलिए छोटा रूट पहले प्लान के मुताबिक तो मेट्रो को विजयनगर तक 11 किमी के एलिवेटेड कॉरिडोर पर चलाना था, ताकि यात्री मिले, लेकिन उस हिसाब से काम नहीं हो सका। कई जगह ट्रैक डलना है, सिविल वर्क बाकी है, इसलिए पहले दौर के रूट को घटाकर 6 किमी कर दिया। एयरपोर्ट से जोड़ना जरूरी मेट्रो को, लखनऊ में ऐसा ही
लखनऊ में 15 किमी का कॉरिडोर बनाया है। उसमें उन्होंने पूरे शहर को एयरपोर्ट से जोड़ दिया है। अब वहां एयरपोर्ट पर टैक्सी से जाने वालों की संख्या कम हुई है। यानी एयरपोर्ट से गांधी नगर स्टेशन जुड़ने पर आधी समस्या खत्म हो जाएगी। यात्रियों का ये है अनुमान


