प्रदेश में पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले डीलरों के लिए परिवहन विभाग से ऑथराइजेशन यानी ट्रेड लाइसेंस लेना अब अनिवार्य कर दिया गया है। इस संबंध में आरटीओ विक्रमजीत सिंह कंग ने पुराने वाहन कारोबारियों के साथ बैठक कर नई व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि 1 जनवरी 2026 से बिना ट्रेड लाइसेंस कोई भी डीलर पुराने वाहनों की बिक्री नहीं कर सकेगा। आरटीओ ने बताया कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वर्ष 2022 की अधिसूचना के तहत केंद्रीय मोटरयान नियम, 1989 में नियम 55 ए से 55 एच जोड़े गए हैं। इन नियमों के लागू होने से पुराने वाहनों के व्यापार में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। ट्रेड लाइसेंस के लिए डीलर को 25 हजार रुपए शुल्क आरटीओ कार्यालय में जमा करना होगा। नए प्रावधानों के तहत वाहन स्वामी को पुराना वाहन बेचते समय फॉर्म-29सी भरना होगा। शहर में एक भी डीलर के पास नहीं ट्रेड लाइसेंस, निगम में भी पंजीयन नहीं परिवहन विभाग के अनुसार शहर में 50 से अधिक डीलर हैं जो पुराने वाहन बेचने व खरीदने का कारोबार करते हैं। जिले में हर साल लगभग 12 हजार पुराने वाहनों के री-रजिस्ट्रेशन आरटीओ कार्यालय में होते हैं। लेकिन एक भी डीलर के पास परिवहन विभाग का ट्रेड लाइसेंस नहीं है। इतना ही नहीं पुराने वाहन बेचने वाले डीलर ने नगर निगम से भी मंजूरी नहीं ली। लेकिन किसी भी डीलर के खिलाफ न तो परिवहन विभाग ने कार्रवाई की न ही नगर निगम ने। लेकिन अब 1 जनवरी से परिवहन विभाग ने पुराने वाहन बेचने के लिए ट्रेड लाइसेंस लेने की अनिवार्यता लागू कर दी है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इस बात की है कि यह डीलर पुराने वाहनों को अपने नाम न कराने की बजाय सीधे विक्रेता को बेच देते हैं। ऐसे में इन डीलर पर कार्रवाई करना भी एक बड़ी चुनौती रहेगी।


