किसानों की मेहनत और खेतों की पैदावार से खिलवाड़ करने वाले नकली उर्वरक कारोबार पर कृषि विभाग ने बीकानेर में बड़ी चोट की है। जामसर से दाउदसर रोड पर चल रही एक संदिग्ध निर्माण इकाई पर औचक निरीक्षण के दौरान टीम ने 10 हजार बैग का विशाल स्टॉक जब्त कर फैक्ट्री को सीज कर दिया। प्राथमिक जांच में जिप्सम के दानों का इस्तेमाल कर नकली खाद तैयार करने की आशंका जताई गई है। राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के निर्देशानुसार कृषि विभाग की टीम ने सहायक निदेशक कृषि (मुख्यालय) सुरेंद्र कुमार मारू के नेतृत्व में यह कार्रवाई की। मौके पर 50-50 किलो के बैग में सफेद और काले रंग के जिप्सम का भंडारण और पैकिंग पाई गई। कई बैग बिना मार्का के थे, जिससे अवैध उत्पादन की आशंका और गहरी हो गई। कृषि अधिकारी गिरिराज चारण और कृषि आदान निरीक्षक दल ने तत्काल परिसर और स्टॉक को जब्त कर सील कर दिया। संयुक्त निदेशक कृषि मदनलाल ने बताया कि जिप्सम के दानों का उपयोग नकली उर्वरक बनाने में किया जा सकता है, इसलिए यह सीजर कार्रवाई की गई। मौके से नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे गए हैं, ताकि रासायनिक जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो सके। नकली खाद का धंधा, किसान की जेब पर डाका
नकली उर्वरक सिर्फ आर्थिक धोखाधड़ी नहीं, बल्कि कृषि तंत्र पर सीधा हमला है। जब किसान असली समझकर नकली खाद डालता है, तो फसल की वृद्धि रुक जाती है, उत्पादन घटता है और मिट्टी की उर्वरता भी प्रभावित होती है। कई बार बीज अंकुरित नहीं होते या पौधे कमजोर रह जाते हैं। किसान को दोहरी मार झेलनी पड़ती है, पहले महंगा दाम, फिर खराब पैदावार। ऐसे धंधे से बाजार में असली कंपनियों की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण, सख्त दंड और किसानों में जागरूकता ही इस समस्या का स्थायी समाधान है। फैक्ट्री पर कोई बोर्ड या पहचान भी नहीं मिली
निरीक्षण के दौरान दो श्रमिक कार्यरत मिले। फैक्ट्री पर कोई बोर्ड या वैध पहचान नहीं थी। प्राथमिक स्तर पर आशंका है कि कम लागत की सामग्री को महंगे उर्वरक के नाम पर बेचा जा रहा था। विभाग अब यह भी जांच करेगा कि यहां से माल कहां-कहां सप्लाई किया गया। सहायक निदेशक सुरेंद्र मारू ने बताया कि दोषियों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम और उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। पुलिस सहायता भी मांगी गई है, ताकि सीज स्टॉक से छेड़छाड़ न हो। ज्ञात रहे, इससे पहले भी प्रदेश में कृषि मंत्री के निर्देश पर कई जगह ऐसी इकाइयों पर कार्रवाई हो चुकी है, जिससे नकली खाद कारोबारियों में हड़कंप है। कृषि मंत्री पहले भी नकली खाद और केमिकल की कर चुके हैं धरपकड़ कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने पहले भी नकली खाद-बीज और मिलावटी उत्पादों के खिलाफ कई बार बड़ी छापेमारी और सीजर कार्रवाइयां की हैं, लेकिन अवैध कारोबार अभी भी पूरी तरह बेअसर नहीं हुआ है। सबसे पहले 28 सितंबर 2025 को मंत्री मीणा ने बीकानेर और श्रीगंगानगर में रात के समय दो अलग-अलग गोदामों और फैक्ट्रियों पर छापा मारकर करीब 24,000 बैग नकली खाद, बीज और कच्चा सामान जब्त किया था। इसी सूचना के आधार पर गजनेर थाना क्षेत्र में एक अवैध गोदाम को चिन्हित कर सीज कर दिया गया, जहां खादों में मिलावट और केमिकल मिला कर बेचा जा रहा था। कुछ ही समय बाद बीकानेर के कोलायत क्षेत्र में देर रात कार्रवाई में मंत्री मीणा ने दो फैक्ट्रियों पर छापा मारकर कुल 64,000 बैग नकली उर्वरक जब्त कर फैक्ट्रियों को सील करा दिया था। इनमें मिट्टी-मिश्रित उर्वरक पाया गया जो राजस्थान के कई इलाकों और नेपाल तक सप्लाई हो रहा था। इसके अलावा गजनेर क्षेत्र में 1400 टन मिलावटी डीएपी खाद भी पकड़ा गया था, जिसे असली बताकर किसानों को बेचा जाना था। यह खाद नकली डीएपी के रूप में पैक कर रखा गया था, जिसका भी भंडाफोड़ किया गया। कृषि विभाग ने बार-बार इन धंधों को रोकने के लिए कार्रवाई की है, लेकिन निगरानी ढीली होने पर नए नेटवर्क सक्रिय हो जाते हैं, यही वजह है कि नकली खाद-बीज और मिलावटी इनपुट्स का कारोबार बीकानेर क्षेत्र में फल-फूल रहा है। पंजाब, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी इन जैसे गिरोहों पर कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन देरी से दंड और कमजोर निगरानी इसे पूरी तरह नियंत्रित नहीं कर पा रही है। इसके अलवा नापासर में मंत्री किरोड़ी लाल ने बायोडीजल के नाम पर अवैध डीजल-केमिकल के भड़ारण का खुलासा भी किया था इसके बावजूद जिले में अब भी बायो़डीजल के नाम पर डीजल-केमिकल की धड़ल्ले से बिक्री जारी है।


