नकोदर बेअदबी कांड40 साल बाद पीड़ितों को नहीं मिला इंसाफ:चार शहीद नौजवानों में से सिर्फ एक के पिता जीवित, SGPC पर साथ न देने के आरोप

नकोदर बेअदबी कांड को आज पूरे 40 साल हो चुके हैं, लेकिन इस दर्दनाक घटना में शहीद हुए चार सिख नौजवानों के परिवारों को अब तक इंसाफ नहीं मिल पाया। न ही यह घटना किसी बड़े पंथक मुद्दे के रूप में उभर सकी। इस घटना में शहीद हुए चार नौजवानों में शामिल थेरविंदर सिंह लित्तरांहरमिंदर सिंह रायपुर चालूपुरबलधीर सिंह रामगढ़झिलमण सिंह गोरसियांइन शहीदों के माता-पिता न्याय की आस में वर्षों से इंतजार कर रहे हैं। चार में से सिर्फ शहीद रविंदर सिंह के पिता जीवित चार शहीद नौजवानों में से अब केवल शहीद रविंदर सिंह लित्तरां के पिता बापू बलदेव सिंह ही जीवित हैं। वे हर साल कनाडा से भारत आकर चारों नौजवानों की संयुक्त बरसी मनाते हैं। ये चारों नौजवान उस समय ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन में सक्रिय थे। 40 वर्षों में 8 मुख्यमंत्री बदले, इंसाफ नहीं मिला बलदेव सिंह ने कहा कि बीते चार दशकों में पंजाब में 8 मुख्यमंत्री बदले, लेकिन किसी भी सरकार ने इस मामले में न्याय दिलाने के लिए गंभीर कदम नहीं उठाए।उन्होंने आरोप लगाया कि40 वर्षों में 10 SGPC अध्यक्ष बनेलेकिन किसी ने भी पीड़ित परिवारों की बांह नहीं पकड़ी जांच कमेटी बनी, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई बलदेव सिंह के अनुसार, मार्च 1986 तक SGPC के प्रधान रहे जथेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा ने इस घटना की जांच के लिए कमेटी बनाई थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई।उन्होंने कहा कि 15 वर्षों तक पंजाब में पंथक सरकार भी रही और प्रकाश सिंह बादल कई बार मुख्यमंत्री बने, फिर भी इंसाफ की कोई पहल नहीं हुई। 2 फरवरी 1986 को हुई थी घटना यह घटना 2 फरवरी 1986 को नकोदर के गुरुद्वारा गुरु अर्जन देव जी, मोहल्ला गुरु नानकपुरा में हुई थी।उस दौरान शरारती तत्वों द्वारा गुरु ग्रंथ साहिब जी के पांच स्वरूपों को कथित रूप से अग्नि भेंट कर दिया गया था। इस घटना के विरोध में सिख संगत शांतिपूर्वक जुलूस निकाल रही थी। बिना चेतावनी पुलिस फायरिंग में चार नौजवान शहीद जब संगत अग्नि भेंट हुए स्वरूपों को श्री गोइंदवाल साहिब ले जाने के लिए आगे बढ़ी, तब पंजाब पुलिस ने बिना किसी चेतावनी के गोलियां चला दीं।इस फायरिंग में चार सिख नौजवान शहीद हो गए।उस समयजालंधर के एडीसी दरबारा सिंह गुरुएसएसपी इजहार अली तैनात थे।आज भी न्याय की प्रतीक्षा40 साल बीत जाने के बावजूद पीड़ित परिवार न्याय की आस लगाए बैठे हैं। बलदेव सिंह ने मांग की कि इस कांड की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा दी जाए।

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