केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार के सवा साल के कार्यकाल में छठवीं बार छत्तीसगढ़ आए हैं, लेकिन अगस्त 2024 में उन्होंने नक्सलियों के खात्मे की डेडलाइन 31 मार्च 2026 तय की थी। अब शनिवार को दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी के दर्शन कर उन्होंने अगले चैत्र नवरात्र से पहले नक्सलियों के खात्मे का दावा किया है। शाह का दावा इसलिए भी मजबूत माना जा सकता है क्योंकि अगस्त से अब तक नक्सल क्षेत्र में तैनात जवानों ने 223 नक्सलियों को मार गिराया है जबकि 800 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। वहीं 300 से ज्यादा नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है। पिछली बार शाह के छत्तीसगढ़ से जाते ही 29 अगस्त को नारायणपुर में तीन महिला नक्सली मारे गए थे और इसी दिन बीजापुर में 24 लाख का इनामी नक्सली गिरफ्तार हुआ था। इसी तरह 3 सितंबर को बीजापुर-दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला इलाके में जवानों ने 9 नक्सली मार गिराए थे। जबकि इसके ठीक बाद 8 सितंबर को बीजापुर में विस्फोटक के साथ तीन नक्सली पकड़े गए थे। तब से अब तक पुलिस और सुरक्षा बल के जवान लगातार अभियान चला रहे हैं।
सेटेलाइट-ड्रोन से मिल रही सटीक सूचना
राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) के ड्रोन व उपग्रह आधारित लाइव सूचना से जवानों को लगातार सफलता मिल रही है। एनटीआरओ ने छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश के नक्सल प्रभावित करीब 125 गांवों की थर्मल मैपिंग की है। नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने तक पहुंच चुकी है फोर्स
सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे ऑपरेशन की वजह से नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना भी अब फोर्स की जद में आ चुका है। यही वजह है कि नक्सली अब छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा की तरफ अबूझमाड़ के अलावा गरियाबंद और ओडिशा सीमा में नया ठिकाना बना रहे हैं। इसके अलावा आंध्र और तेलंगाना के अंदरुनी इलाकों में शरण लेने की कोशिश की जा रही है। एक ओर फोर्स का हमला तो दूसरी ओर गांवों में पहुंच रहा विकास
राज्य सरकार एक ओर जहां फोर्स के माध्यम से लगातार हमला कर नक्सलियों पर दबाव बना रही है, वहीं दूसरी ओर नियद नेल्लानार जैसी योजनाओं के दम पर बस्तर के अंदरुनी इलाकों को विकास से भी जोड़ रही है। इसके माध्यम से शासन की 32 योजनाएं लोगों तक पहुंचाई जा रही है। वहीं कनेक्टिविटी के तहत 253 मोबाइल टावर शुरू किए गए हैं।
आजादी के बाद पहली बार 26 गांव के लोग फहराए पाए तिरंगा
फोर्स के लगातार बढ़ते दबाव के कारण आजादी के बाद पहली बार 26 जनवरी 2025 को 26 गांवों में तिरंगा फहराया गया। ये गांव बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर जिले के हैं। बीजापुर जिले में गुंडम, फुटकेल, छुटवाही, कोंडापल्ली, ज़िडपल्ली, वाटेवागु, कर्रेगट्टा, पीड़िया, नारायणपुर जिले में कस्तुरमेटा, मसपुर, ईरकभट्टी, मोहंदी, होरादी अन्य शामिल हैं। 9 फरवरी को एक साथ मारे गए 31 नक्सली
बीजापुर में 9 फरवरी 2025 को जवानों ने 31 नक्सलियों को मार गिराया था। हालांकि, दो जवान भी शहीद हुए थे। इसी तरह 2 जनवरी को बीजापुर में पांच नक्सली तो 3 जनवरी को गरियाबंद में 3 नक्सली मारे गए। 5 जनवरी को अबूझमाड़ में पांच नक्सली, 16 जनवरी को बीजापुर-सुकमा में 18 नक्सली, 20 जनवरी को गरियाबंद में 16 नक्सली, 1 फरवरी को बीजापुर के कोरचोली में 8 नक्सली औ 2 फरवरी को कांकेर के पानीडोबिर एक नक्सली मारा गया था।


