जो नक्सली पहले हथियारों के दम पर जीत चाहते थे, अब वे बस्तर ओलिंपिक में खिलाड़ियों से जीतने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने नक्सलियों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी, कुछ नक्सलियों के डॉक्टर टीम का हिस्सा रहे और अब टीम के कोच हैं। इनमें कई नक्सली, हिड़मा और देवा के साथ हिंसा फैलाने और जवानों और आम नागरिकों की हत्या में शामिल थे। अब सरेंडर के बाद वे मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। 8-8 लाख रुपए के इनामी रहे ये नक्सली अब वॉलीबॉल, कबड्डी जैसे खेल खेल रहे हैं। बस्तर IG सुंदरराज पी के अनुसार, इस साल 761 सरेंडर नक्सली और नक्सल हिंसा पीड़ित परिवार के सदस्य बस्तर ओलिंपिक में शामिल हुए हैं। पढ़िए, नक्सली से खिलाड़ी बनने की कहानियां:- कहानी-1 मेरा नाम लक्ष्मण कोर्राम है। कोंडागांव जिले के अंदरूनी इलाके का रहने वाला हूं। घर की स्थिति ठीक नहीं थी इसलिए कभी स्कूल ही नहीं जा पाया। पढ़ाई नहीं किया हूं। 16-17 साल की उम्र में ही मैंने नक्सल संगठन जॉइन कर लिया था। हाथों में हथियार थाम लिया था। कमांडर विलास ने मुझे नक्सल संगठन में भर्ती किया था। उसी ने ट्रेंड किया था। हमें बताया गया था कि बोधघाट परियोजना का विरोध करना है। इस परियोजना से 100 गांव डूब जाएंगे। सभी को एक होना है। यही वजह थी कि मैं संगठन में शामिल होने चला गया। मेरे साथ कुछ और भी लोग गए थे। कुछ ने सरेंडर कर दिया और कुछ का एनकाउंटर हो गया। अभी का माहौल बदल गया है। पुलिस का ऑपरेशन ज्यादा हो गया है। कहानी-2 मेरा नाम मासा उर्फ समीर है। मैं बीजापुर जिले का रहने वाला हूं। साल 2007-8 से नक्सल संगठन के साथ जुड़कर काम किया और इसी साल 2025 में मैंने हथियार डाला। नक्सली लीडर और सेंट्रल कमेटी मेंबर रामधेर, हिड़मा, देवा समेत अन्य बड़े नक्सलियों के साथ काम कर चुका हूं। मैं नक्सल संगठन में नए भर्ती हुए लड़कों को ट्रेनिंग देता था। टीचर था। बड़े लीडर दंडकारण्य में अलग-अलग इलाके में बने ट्रेनिंग सेंटर भेजते थे। वहां जाकर ट्रेनिंग देना होता था। लंबे समय तक नक्सल संगठन में सक्रिय था, लेकिन अब वर्तमान की परिस्थितियां बदल गई है। इसलिए सतीश दादा के साथ जगदलपुर में आकर आत्म समर्पण कर दिया। हथियार डाल दिया हूं। मैं AK-47 और इंसान जैसे राइफल चलाता था। हिड़मा और देवा के साथ भी लंबे वक्त तक मैंने काम किया है। कहानी-3 डॉक्टर टीम प्रभारी ने कहा- यहां जिंदगी सुकून भरी मेरा नाम कुंवर सिंह कोवाची है। कांकेर जिले का रहने वाला हूं। जब 16-17 साल का था तभी नक्सल संगठन में शामिल हो गया था। कक्षा 6वीं तक पढ़ाई किया हूं। कंपनी नंबर 5 में CYPC सदस्य था। नक्सल संगठन ने मुझे डॉक्टर टीम का प्रभारी बनाया था। लंबे समय तक संगठन के साथ जुड़कर मैंने काम किया है। सरकार ने मुझ पर 8 लाख रुपए का इनाम रखा था। अंदर की जिंदगी ठीक नहीं। जब भी फोर्स अंदर घुसती तो यहां-वहां भागना पड़ता था। अब हथियार डालकर मुख्य धारा में लौट आया हूं। इसी साल सरेंडर किया हूं। नक्सल संगठन में जब था तो नक्सलियों ने मेरी नसबंदी करवा दी थी। अब पत्नी के साथ मैंने सरेंडर कर दिया है। अमित शाह करेंगे शिरकत बता दें कि 11 दिसंबर से बस्तर ओलिंपिक की शुरुआत हुई थी। आज 13 दिसंबर को उसका समापन है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इसमें शिरकत करेंगे। वे बस्तर ओलिंपिक के विजेताओं को पुरस्कार देंगे। ये तस्वीरें भी देखिए… …………………………… इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… बस्तर में सरेंडर्ड नक्सली चलाएंगे कैफे: खाना बनाने-सर्व करने की ट्रेनिंग दी गई; पहले दिन CM साय ने फूड ऑर्डर किया छत्तीसगढ़ के बस्तर में पंडुम कैफे की शुरुआत की गई है जिसका संचालन सरेंडर्ड नक्सली और नक्सल हिंसा पीड़ित परिवार के लोग करेंगे। इसके लिए बकायदा उन्हें खाना बनाने, सर्व करने, ऑर्डर लेने की ट्रेनिंग दी गई। शुरुआत में 13 लोग मिलकर इस कैफे को चलाएंगे। पढ़ें पूरी खबर…


