कोंडागांव में नक्सल मुक्त होने के बावजूद शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मांझानार, उहुपाल और तुमड़ीबाल गांव के स्कूलों में बच्चे अधूरी दीवारों और जर्जर टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। 2009 में नक्सली हमले में स्कूल भवन क्षतिग्रस्त हो गए थे। 2021 में जिले को नक्सल मुक्त घोषित किया गया। लेकिन 15 साल बीत जाने के बाद भी नए भवन नहीं बन पाए हैं। स्कूलों में न पक्के कमरे हैं, न फर्नीचर और न ही सुरक्षित वातावरण। बरसात में छत से टपकता है पानी मांझानार की शिक्षिका ज्योति कश्यप और उहुपाल के शिक्षक कुरसु राम कश्यप की मानें तो स्थिति बेहद खराब है। बरसात में छत से पानी टपकता है। सर्दियों में ठंडी हवाएं परेशान करती हैं। दीवारों में छेद होने से सांप-बिच्छुओं का खतरा बना रहता है। शौचालय की सुविधा भी नहीं है। ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि नक्सल मुक्त होने के बाद भी उनके बच्चों को सुरक्षित स्कूल नहीं मिल पाया है। जिला शिक्षा अधिकारी भारती प्रधान के अनुसार नए भवनों के लिए प्रस्ताव भेजा गया है और जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।


