आँखों में आँसू, दिल में बेघर होने का डर और सिर पर आसमान टूटने का एहसास… यह डर था कच्चे कुंडा पर रहने वाले उन 26 परिवारों का, जिनके घर शहर के विकास की भेंट चढ़ने वाले थे। ऐसे में अफसरों ने नियम-कायदों को एक तरफ रखकर मानवता के पक्ष में निर्णय लिया। नगर निगम के अधिकारियों ने इन परिवारों को शहर के अच्छे इलाकों में फ्लैट आवंटित किए। इसके लिए सोमवार को नगर निगम परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें इन सभी परिवारों के सदस्यों को बुलाया गया। यहां पर को नगर निगम आयुक्त श्रवण कुमार, सचिव विजय प्रताप सिंह और राजस्व अधिकारी की तेजराम मीना मौजूदगी में लॉटरी के द्वारा फ्लैट दिए गए। प्रक्रिया के दौरान एक बॉक्स में लाभार्थी का नाम और दूसरे में फ्लैट संख्या की पर्ची डाली गई थी। एक लाभार्थी के साथ आई बच्ची से पर्चियां निकलवाई। इस दौरान आयुक्त ने पर्ची में लिखा लाभार्थी का नाम और फ्लैट संख्या बोलकर आवंटित किए। नया आशियाना पाकर कई लाभार्थी अधिकारियों को हाथ जोड़कर धन्यवाद देते नजर आए। 21 परिवारों को जिंदल नर्सिंग होम के पास बने फ्लैट दिए गए। जबकि शेष पांच को मेडिकल कॉलेज के पास बने फ्लैट आवंटित किए। भरतपुर. 80 फीट रोड़ के लिए इस रास्ते को चौड़ा किया जाएगा। सबसे भयावह स्थिति उन घरों की है, जहाँ एक छत के नीचे तीन-तीन परिवारों का गुजर-बसर था। निर्भय का घर, जहाँ तीन परिवार एक साथ रहते थे, अब 90 प्रतिशत तक तबाह होने वाला है। इसी तरह, मुकेश और कृष्ण के घर भी 90 प्रतिशत तक टूटेंगे, जिसमें भी तीन-तीन परिवार रहते हैं। इन घरों के टूटने का मतलब है कि इन परिवारों के पास रहने के लिए एक कमरे तक की जगह नहीं बचेगी। उदयभान के घर का 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सड़क में समा जाएगा। उनकी तरह ही मोहन सिंह, फूल सिंह, नारायण सिंह, रतन सिंह और महिला प्रेम के मकान भी 50-60 प्रतिशत तक ध्वस्त होंगे। इन सभी घरों में एक से दो परिवार रहते हैं, जिनके लिए यह घर उनकी पहचान थी। राकेश और नवल का भी हाल कुछ ऐसा ही है। उनके घरों का 60 प्रतिशत हिस्सा तोड़ा जाना है, जिसमें दो-दो परिवार अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इन सबकी तरह ही हरिओम, संजय, राधे, आशु, सागर, खुशहाल, सन्नी, विनोद, प्रेम सिंह मोहन, श्रीमती प्रकाश, लक्ष्मी, रतन सिंह और संतो देवी के मकान भी विकास की भेंट चढ़ने वाले हैं। “विकास कार्यों के साथ-साथ परिवारों की सुरक्षा और मानवीय दृष्टिकोण को भी प्राथमिकता दी गई है। सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रभावित 26 मकानों में रह रहे परिवारों को पहले ही पक्के आवास उपलब्ध करवा दिए गए हैं । जिंदल नर्सिंग होम के पास 21 और मेडिकल कॉलेज के पास 5 फ्लैट दिए हैं। प्रशासन केवल विकास नहीं करता, बल्कि जनता की सुरक्षा और सुविधा का ख्याल भी रखता है।” -श्रवण कुमार, आयुक्त, नगर निगम, भरतपुर


