नया वाटर रेट लागू करेगी सरकार:उद्योगों को पानी देने लगाए जाएंगे स्मार्ट मीटर, 100 नई भर्तियां करेंगे, बनाई जा रही है नई योजना

छत्तीसगढ़ में पानी की उपयोगिता तय करने के लिए राज्य सरकार बड़ा प्लान तैयार कर रही है। इसके तहत प्रदेश में दस साल पुराने पानी की कीमत को रिवाइज किया जा रहा है। साथ ही उद्योगों को देने वाले पानी में स्मार्ट मीटर लगाया जाएगा। दरअसल, छत्तीसगढ़ में लगातार वाटर लेवल डाउन हो रहा है और पानी का दोहन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन पानी से मिलने वाले राजस्व में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। इसे ध्यान में रखते हुए नई योजना बनाई जा रही है। बताया गया है कि वर्तमान में उद्योगों, कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए निर्धारित पानी की दर काफी कम है। पानी का सबसे ज्यादा उपयोग खेती और उद्योगों में होता है, इसलिए रिवाइज दरों में इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। विभाग इस पर काम कर रहा है और रेट तय करने से पहले कैबिनेट से मंजूरी ली जाएगी। वहीं बिजली के लिए लगाए गए स्मार्ट मीटर की तर्ज पर उद्योगों में पानी का दुरुपयोग रोकने के लिए स्मार्ट मीटर लगाने की योजना तैयार की जा रही है। इससे पानी का दुरुपयोग रोका जा सकेगा और उद्योगों से मिलने वाले पानी के राजस्व में बढ़ोतरी होगी। स्मार्ट मीटर का उपयोग राइस मिल, पावर प्लांट और स्टील प्लांट में किया जाएगा। इसी तरह बस्तर और सरगुजा के लिए बड़े प्रोजेक्ट बनाए जाएंगे, ताकि वहां के ​लोगों और किसानों को पानी की तकलीफ न झेलनी पड़े। विभाग में स्टॉफ की कमी को दूर करने के लिए सब इंजीनियर के 100 नए पदों पर भर्ती की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। साथ ही विभाग में यदि दक्ष अधिकारी-कर्मचारी नहीं हैं, तो दक्षता बढ़ाने के लिए ठेके पर ऐसे लोगों की भर्ती की जाएगी। नहर नहीं, अंडरग्राउंड पाइप लाइन से पहुंचाएंगे पानी नहर से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पानी पहुंचाने की योजना में काफी मात्रा में पानी की बर्बादी होती है। इसे देखते हुए अब आधुनिक तकनीक पर फोकस किया जा रहा है। इसके तहत एक स्थान से दूसरे स्थान पर अंडरग्राउंड पाइपलाइन से पानी पहुंचाया जाएगा। इससे जमीन अधिग्रहण में होने वाली परेशानी के साथ ही पेड़ों की कटाई से भी बचा जा सकेगा। 80-90 फीसदी क्षमता वाली योजनाएं बनाएंगे सिंचाई क्षमता का विस्तार करने के दौरान यह बात सामने आई है कि किसानों तक 60 से 70 फीसदी तक ही सिंचाई क्षमता पहुंच पाती है, लेकिन नई तकनीक के माध्यम से 80 से 90 फीसदी तक सिंचाई क्षमता बढ़ाया जाएगा ताकि किसानों को समय पर पानी उपलब्ध हो सके। इसके साथ ही स्टोरेज कैपिसिटी बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

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