नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा -:विधानसभा की 7 दशक की यात्रा में सशक्त हुए हैं लोकतांत्रि‍क मूल्‍य

मप्र विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि मप्र विधानसभा ने संसदीय प्रक्रियाओं, नियमों, परंपराओं एवं सदन संचालन के जरिए एक सुशासित, जनकल्‍याणकारी एवं विकासोन्‍मुखी राज्‍य बनाने में अपनी अहम भूमिका अदा की है। 1 नवंबर 1956 को मध्‍यप्रदेश के पुनर्गठन के साथ ही विधानसभा अस्तित्व में आई और इसका पहला अधिवेशन 17 दिसंबर 1956 को शुरु हुआ था। आगामी 17 दिसंबर को मप्र विधानसभा गठन के 69 वर्ष पूर्ण होकर 70 वें वर्ष में प्रवेश हो रहा है। इसलिए मप्र विधानसभा के गठन की 69वीं वर्षगांठ पर 17 दिसंबर को एक दिवसीय विशेष सत्र आहूत किया गया है। यह वह दिन होगा जब हम अपने अतीत का स्‍मरण कर उससे सीखेंगे और भविष्‍य के लि‍ए नए संकल्‍प लेंगे। इस एक दिवसीय सत्र में मध्‍यप्रदेश को विकसित, आत्‍मनिर्भर और समृद्ध बनाने पर भी चर्चा होगी। विधानसभा की वर्षगांठ पर प्रदेश के विकास का नया रोडमैप तैयार हो इसके लिए सदन के सभी सदस्‍यों की सक्रिय भागीदारी और विचार अपेक्षित हैं। मप्र विधान सभा ने अपनी स्थापना से लेकर अब तक जन आकांक्षाओं की पूर्ति में एक सशक्त भूमिका निभाई है। यहां बहस, हंगामे पर सदैव भारी रही है। महिलाओं को अधिक समय 16 वीं वि‍धानसभा के दो साल में 7 सत्र आयोजित किए जिसमें 51 विधेयक पारित कि‍ए गए। 16 हजार से अधिक तारांकि‍त और अतारांकित प्रश्‍नों के माध्‍यम से जनता से जुड़े मुद्दों के जवाब सरकार की ओर आए हैं। 66 ध्‍यानाकर्षणों पर चर्चा हुई और 84 पटल पर रखे गए। शून्‍यकाल की समस्‍या को जीवंत बनाया गया, ताकि आम जनता से जुड़े विषयों को सदन में रखने के लिए सदस्‍यों को अधिक से अधिक समय मिले। नए सदस्‍यों और महिला सदस्‍यों को बोलने के लिए उन्‍हें ज्‍यादा से ज्‍यादा समय देने का प्रावधान किया गया है।

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