नर्मदापुरम के मोहासा औद्योगिक क्षेत्र में रिन्यूएबल एनर्जी पार्क के खाली प्लॉट नंबर 18 से 12 हजार 319 घनमीटर मिट्टी (भसुआ) के अवैध उत्खनन का मामला उजागर हुए 11 दिन बीत चुके हैं। राजस्व, खनिज और एमपीआईडीसी के अफसर अब तक मिट्टी खोदकर चुराने वालों को नहीं ढूंढ पाए हैं। हकीकत यह है कि प्रकरण की फाइल अभी एसडीएम ऑफिस से आगे नहीं बढ़ पाई है और विभाग केवल पत्राचार में उलझे हैं। तहसीलदार, खनिज निरीक्षक और पटवारी के प्रतिवेदन में कहीं भी मिट्टी खोदने, परिवहन करने या मिट्टी कहां गई, इसका उल्लेख नहीं है। जांच में देरी होने के कारण अब एसडीएम हल्का पटवारी और ग्राम कोटवार को नोटिस देने की बात कह रहे हैं। 5 दिसंबर को कंपनी ने वापस किया था प्लॉट मोहासा संभाग का सबसे बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है। एमपीआईडीसी ने मेसर्स प्रीमियम इंजीनियर्स ग्लोबल एनवायरनमेंट प्राइवेट लिमिटेड को प्लॉट नंबर 18 आवंटित किया था, लेकिन इन्वेस्टर ने प्लांट का प्लान कैंसिल कर 5 दिसंबर को प्लॉट वापस कर दिया। इसके बाद ही माफिया ने यहां से मिट्टी खोदी। 18 दिसंबर को दैनिक भास्कर ने मामला उजागर किया, जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची थी। आसपास की फैक्ट्रियों में मिट्टी खपने की आशंका सूत्रों के मुताबिक, चोरी की गई मिट्टी की खपत औद्योगिक क्षेत्र में ही चल रहे निर्माण कार्यों में होने की आशंका है। प्रशासन अब सभी कंपनियों को नोटिस जारी कर पूछेगा कि उन्होंने मिट्टी कहां से खरीदी। यदि किसी इकाई में चोरी की मिट्टी का उपयोग पाया गया, तो उन कंपनियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। एमपीआईडीसी कराएगा एफआईआर एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक महेंद्र वर्मा का कहना है, “मिट्टी का अवैध उत्खनन का मामला गंभीर है। मिट्टी को खोदने वाले और जहां मिट्टी का उपयोग हुआ, उनके खिलाफ एफआईआर कराएंगे। पहले मिट्टी के सैंपल के लिए हमने खनिज विभाग को पत्र लिखा है।” सीसीटीवी फुटेज से मिल सकता है सुराग मोहासा औद्योगिक क्षेत्र की कई इकाइयों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इतनी बड़ी मात्रा में उत्खनन मशीनों से ही संभव है। यदि मिट्टी का परिवहन क्षेत्र से बाहर या अंदर हुआ है, तो वह कैमरों में रिकॉर्ड हुआ होगा। सीसीटीवी फुटेज की जांच से अवैध उत्खनन करने वालों के खिलाफ सबूत मिल सकते हैं।


