नर्मदापुरम में 2 हजार विद्यार्थियों का गीता पाठ:विद्यार्थियों को गीता का उपदेश सुनाया, कहा-मोबाइल देखना और देर तक सोना नहीं

मप्र में सोमवार को गीता जयंती महोत्सव मनाया जा रहा हुआ। प्रदेश के 55 जिलों के 405 तहसीलों में गीता जयंती महोत्सव का कार्यक्रम आयोजित हुआ। नर्मदापुरम जिला मुख्यालय पर एसएनजी स्कूल ग्राउंड पर सुबह 11 बजे सामूहिक गीता पाठ का आयोजन हुआ। सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के करीब 2 हजार विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से भागवत गीता के एक अध्याय का पाठ किया। इससे पहले सभी ने सरस्वती वंदना भी की। सुबह 10 बजे से ग्राउंड पर विद्यार्थी पहुंच गए। अतिथियों के पहुंचने पर 11 बजे मां सरस्वती पूजन और गीताजी की पूजन हुई। वक्ताओं ने कहा गीता जी में जीवन का सार है श्रीमद्भगवद्‌गीता का 15वां अध्याय पुरुषोत्तम योग मानव जीवन को दिव्य दृष्टि प्रदान करता है, कर्म, भक्ति और ज्ञान के अद्वितीय समन्वय का संदेश देता है। इस अध्याय का सामूहिक पाठ समाज में कर्तव्यनिष्ठा, सत्य, अनुशासन और सत्कर्मों के प्रेरक मूल्यों का प्रसार करता है। गीता प्रतिष्ठान दिल्ली से आएं ब्रह्म देव शास्त्री ने कहा गीता जी दैनिक अध्ययन से हमारे जीवन से नकारात्मक दूर होती है। हमारा मन साफ होता चाहिए। उन्होंने कहा यह गीता का पहला संदेश “नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः। शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः”। इस श्लोक का अर्थ बताते हुए कहा कि अपने कर्तव्यों का पालन करो, क्योंकि कर्म न करना कर्म करने से श्रेष्ठ नहीं है। तुम कर्म नहीं करोगे, तो तुम्हारे शरीर की यात्रा भी पूरी नहीं हो पाएगी। इसलिए विद्यार्थियों का नियत काम है अध्ययन करना। न कि मोबाइल देखना, देर तक सोना। इसलिए विद्यार्थी अपना नियत कार्य करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य पंडित सोमेश परसाई ने की। आत्मज्ञान का अमूल्य संदेश है मुख्य अतिथि सुबोध आनंद फाऊंडेशन ऋषिकेश के अध्यक स्वामी ध्रुव चैतन्य सरस्वती, विशेष अतिथि स्वामी प्रणवदास इस्कॉन मंदिर नर्मदापुरम रहे। आचार्य सोमेश परसाई ने गीता जयंती महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि मानव जीवन के लिए नीति, कर्तव्य, धर्म एवं आत्मज्ञान का अमूल्य संदेश है। इस अवसर पर नर्मदापुरम कमिश्नर केजी तिवारी, कलेक्टर सोनिया मीना, जिला पंचायत सीईओ हिमांशु जैन, शहर के धर्माचार्य, पंडित, शास्त्री मंचासीन रहे। एसएनजी स्कूल ग्राउंड में खुले में गीता पाठ का आयोजन हुआ। सभी विद्यार्थियों को गीता अध्ययन की पुस्तक दी गई। धूप तेज होने से कई विद्यार्थी उसी पुस्तक को सिर पर रखकर धूप से बचते नजर आएं।

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