खरगोन के नावडाटौड़ी में नर्मदा जयंती और महाशिवरात्रि के लिए आटे के 20 हजार से अधिक दीपक तैयार किए जा रहे हैं। 80 वर्षीय लक्ष्मीबाई पिछले 10 साल से यह अभियान चला रही हैं, जिसका उद्देश्य नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाना और जलीय जीवों को आहार उपलब्ध कराना है। लक्ष्मीबाई बताती हैं कि उन्हें 10 साल पहले नर्मदा परिक्रमा के दौरान दीपक बनाने की प्रेरणा मिली थी। उन्होंने संतों की प्रेरणा से मां नर्मदा की शुद्धता का संकल्प लिया है और इसे अपनी सेवा मानकर कर रही हैं। इस बार ये 20 हजार से अधिक दीपक शालीवाहन आश्रम के माध्यम से प्रज्ज्वलित कर नर्मदा में प्रवाहित किए जाएंगे। यह पहल नदी प्रदूषण को रोकने के साथ-साथ जलीय जीवों के लिए भोजन भी प्रदान करेगी। क्षेत्र में लक्ष्मीबाई के इस कार्य की सराहना की जा रही है। कसरावद नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि नर्मदा भक्त राजेंद्रसिंह यादव ने उनके प्रयास को प्रेरक बताया। गांव पटेल करणसिंह ने उन्हें साड़ी और नारियल भेंट कर सम्मानित किया, जबकि शिक्षिका सुनीता वर्मा ने इसे धर्म और पर्यावरण की सेवा में एक प्रेरक कार्य बताया। स्विट्जरलैंड और फ्रांस के पर्यटकों ने भी आटे के दीपक बनते हुए देखे। उन्होंने इन दीयों के धार्मिक और पर्यावरणीय महत्व को जाना और इस परंपरा की सराहना करते हुए तस्वीरें और वीडियो भी बनाए।


