भास्कर न्यूज | अमृतसर निजी अस्पताल की लापरवाही से हुई नवजात की मौत के मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों पर पीड़ितों और आरोपी अस्पताल के दोबारा बयान दर्ज होंगे। इसके लिए सिविल सर्जन कार्यालय की ओर से पीड़ित कशिश खन्ना को दोबारा लेटर भेजा गया है। हाईकोर्ट ने एरर शब्द को डिफाइन करने के िलए कहा है। जिसके बाद पुलिस ने सिविल सर्जन ऑफिस को लेटर फॉरवर्ड किया। अब 28 दिसंबर को दोंनो पक्षों को दोबारा मीटिंग के लिए बुलाया गया है। इस दौरान दोनों पक्षों के दोबारा बयान लिए जाएंगे और बयानों के आधार पर अगली कार्रवाई की जाएगी। दरअसल मजीठा रोड स्थित प्राइवेट अस्तपाल की लापरवाही से डिलीवरी केस में नवजात की मौत हो गई थी। सिविल सर्जन को शिकायत के बाद डॉक्टरों के बोर्ड ने रिपोर्ट में अस्पताल की गलती को एरर बताया था। जिसके बाद बसंत एवेन्यू निवासी पीड़ित कशिश खन्ना, करन खन्ना ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब इस मामले में पुलिस कमिश्नरेट विभाग शहर की ओर से सिविल सर्जन दफ्तर से मेडिकल एरर को स्पष्ट करने के लिए रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए सिविल सर्जन दफ्तर की ओर से अन्य मेडिकल एक्सपर्ट बोर्ड में शामिल किए गए हैं, जो दोंनो पक्षों के दोबारा बयान लेंगे। पहले इन्हें 21 नवंबर को दफ्तर बुलाया गया था, लेकिन कशिश खन्ना और करन खन्ना की तबीयत सही न होने के कारण वह सिविल सर्जन ऑफिस नहीं जा सके। बसंत एवेन्यू निवासी कशिश खन्ना 8 साल बाद प्रेग्नेंट हुई थी। जुलाई 2023 से फरवरी 2024 तक उनका 8 बार अल्ट्रासाउंड करवाया गया। वहीं अस्पताल के डॉक्टर बेबी को हेल्दी बताते रहे। लेकिन 12 फरवरी 2024 को उनका सिजेरियन केस कर दिया गया। जन्म के दौरान से ही बच्ची सही तरीके से सांस नहीं ले रही थी। कहीं ओर चेक कराने पर पता चला था कि नवजात के दिल में मल्टीपल छेद हैं। 7 अस्पतालों में धक्के खाते लगभग 29 लाख खर्च होने के बाद 25 मई को उनकी बच्ची ने दम तोड़ दिया। पीड़ित कशिश खन्ना का कहना था कि मेडिकल बोर्ड ने शब्दों में हेरफेर किया, जबकि यह पूरी तरह से नेगलिजेंस था। इसलिए उन्होंने इंसाफ के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।


