भास्कर न्यूज| टिटिलागढ़ समाज को शर्मसार करने वाली एक घटना में सैंतला थाना अंतर्गत धरपागढ़ गांव में एक नवजात बच्ची कचरे के ढेर में मिली। कड़ाके की ठंड और असुरक्षित माहौल के बीच इस नन्हीं सी जान के लिए गांव वाले ”फरिश्ते” बनकर आए और उसकी जान बचाई। जानकारी के अनुसार, धरपागढ़ गांव के कुछ स्थानीय लोगों ने गांव के बाहर कचरे के ढेर के पास से किसी बच्चे के रोने की आवाज सुनी। जब पास जाकर देखा गया, तो वहां कपड़े में लिपटी एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में पड़ी थी। ग्रामीणों ने बिना देर किए बच्ची को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल इसकी सूचना स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आशा वर्कर्स को दी। बच्ची के मिलते ही पूरे गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई। ग्रामीणों ने आपसी सहयोग से बच्ची को प्राथमिक सुरक्षा दी और उसे अस्पताल ले जाने का इंतजाम किया। फिलहाल बच्ची स्वास्थ्य विभाग और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की देखरेख में सुरक्षित बताई जा रही है। इस हृदयविदारक घटना ने स्थानीय लोगों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चर्चा है कि आखिर वह कौन सी मजबूरी या वजह रही होगी, जिसके कारण एक मां ने अपनी कोख से जन्मी बच्ची को कचरे के ढेर में मरने के लिए छोड़ दिया। लोग इसे ”अवैध प्रेम संबंधों” का परिणाम मान रहे हैं या फिर कन्या जन्म के प्रति संकीर्ण मानसिकता का नतीजा। सैंतला पुलिस को मामले की सूचना दे दी गई है। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि यह बच्ची किसकी है और इसे फेंकने वाले कौन हैं। आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों में हाल ही में हुए प्रसवों का रिकॉर्ड भी खंगाला जा रहा है ताकि दोषियों तक पहुंचा जा सके।


