भास्कर न्यूज| धमतरी अप्रैल की गर्मी में आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों को बिना बिजली-पानी के समय बिताना पड़ रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने गर्मी को देखते हुए केन्द्रों का संचालन सुबह 7 से 11 बजे तक तय किया है। इसके बावजूद कई नवनिर्मित केन्द्रों में चार महीने बाद भी बिजली और पानी की सुविधा नहीं मिल सकी है। धमतरी शहर की आबादी करीब 1.30 लाख है। यहां कुल 61 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। इनमें से 17 केन्द्र किराए के भवन में चल रहे हैं। 3 सामुदायिक भवन में संचालित हो रहे हैं। पालकों और पार्षदों की मांग पर विभाग ने हाल ही में 8 नए केन्द्र बनवाए। लेकिन निर्माण एजेंसी ने अब तक बिजली कनेक्शन नहीं लगवाया। न ही पानी के लिए नल की व्यवस्था की गई। गर्मी में छोटे बच्चों को बिना पंखा-कूलर के 4-4 घंटे केन्द्रों में रहना पड़ रहा है। इससे उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है। आमापारा वार्ड की पटेल गली में केन्द्र क्रमांक-2 का नया भवन सुलभ के पास बना है। यहां 14 बच्चे पढ़ने आते हैं। लेकिन बिजली नहीं है। पानी की सुविधा भी नहीं है। सहायिका को आसपास के घरों से बर्तन में पानी लाना पड़ता है। अंबेडकर वार्ड, सरदार वल्लभभाई पटेल, सदर उत्तर और साल्हेवार पारा के केन्द्रों में भी यही स्थिति है। साल्हेवार पारा वार्ड का एक केन्द्र जालमपुर स्कूल परिसर में बना है। यहां भी बिजली कनेक्शन नहीं है। पहले स्कूल से अस्थायी कनेक्शन लिया गया था। लेकिन बिजली बिल को लेकर विवाद हुआ। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने कनेक्शन हटा दिया। महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी महेश मरकाम को शहर का प्रभारी अधिकारी बनाया गया है। चित्ररेखा यादव के रिटायर होने के बाद मरकाम ही जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिजली और पानी की व्यवस्था निर्माण एजेंसी को करनी है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही सभी भवनों में सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। पुराने केन्द्रों में पंखे लगाए गए हैं। निर्माण एजेंसी की लापरवाही का खामियाजा अब छोटे बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। अधिकारी भी अब तक इस पर सख्ती नहीं दिखा सके हैं।


