नहर मरम्मत के नाम पर 1 करोड़ निकले:गरियाबंद में नहीं हुआ काम,दस्तावेज भी गायब,किसान ने किया RTI फाइल तो मिली आधी अधूरी जानकारी मिली

गरियाबंद के फिंगेश्वर में नहरों की मरम्मत के नाम पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। 56 जगह क्षतिग्रस्त बताकर 4.46 लाख रुपए निकाल लिए गए। मामले का खुलासा रोबा के किसान याद राम साहू ने RTI के माध्यम से पर्दाफाश किया है। लेकिन किसान का कहना है कि 1 करोड़ रुपए से अधिक का बंदरबांट किया गया है। जानकारी के मुताबिक, फिंगेश्वर वितरक शाखा नहर के टेल एरिया में 9 माइनर नहरों को 56 स्थानों पर क्षतिग्रस्त बताया गया। इन नहरों से भसेरा, पसौद, सीरीकला, रोबा समेत 10 से अधिक गांवों को सिंचाई की सुविधा मिलती है। जलसंसाधन विभाग ने दावा किया कि 1600 मीटर से अधिक लंबाई में मरम्मत कार्य किया गया। मरम्मत के लिए कथित तौर पर 4600 प्लास्टिक बोरों में रेत भरकर क्षतिग्रस्त स्थलों की मरम्मत की गई। इस कार्य के लिए कोरबा केडी क्लास ठेकेदार विजय कुमार सहित इंडियन इंफ्रा बिल्ड फर्म को 4.46 लाख रुपए का भुगतान किया गया। सभी कार्य वित्तीय वर्ष 2025 की समाप्ति से एक महीने पहले, 20 से 25 फरवरी के बीच किए जाने का दावा किया गया। विभाग ने मजदूरों के मस्टररोल और मरम्मत की एमबी (मेजरमेंट बुक) भी गायब कर दिए, जिसमें 2 लाख रुपए से अधिक का भुगतान दर्शाया गया है। किसान याद राम साहू का आरोप है कि पिछले वित्तीय वर्षों में नहरों की मरम्मत के नाम पर मार्च से पहले 1 करोड़ रुपए से अधिक का बंदरबांट किया गया। उन्होंने सत्यापित दस्तावेजों के साथ एसपी को शिकायत सौंपी है। सिंचाई विभाग रिटायर्ड है किसान फिंगेश्वर के किसान याद राम पहले सिंचाई विभाग में टाइम कीपर थे। खरीफ सीजन में सिंचाई नहीं मिलने पर किसानों ने दो बार दफ्तर का घेराव किया। एसडीओ वीवी मलैया ने मरम्मत का प्रस्ताव भेजा, लेकिन कार्य नहीं हुआ। शक होने पर याद राम ने RTI से जानकारी निकाली और पाया कि मरम्मत कार्य केवल कागजों में हुआ है। न कोई टूट-फूट मिली, न ही मरम्मत सामग्री। सच्चाई बताई तो किया पद से हटाया किसानों का आरोप है कि फरवरी 2025 में 1 करोड़ रुपए से अधिक का गबन फर्जी बिलों के जरिए किया गया। रिकॉर्ड भी दफ्तर से गायब कर दिए गए है। मलैया ने सच्चाई बताई और उच्चाधिकारियों को पत्राचार किया, जिसके बाद उन्हें पद से हटा दिया गया, लेकिन उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया। अब वे प्रभार में तो हैं, लेकिन वित्तीय अधिकार छीन लिए गए हैं। वीवी मलैया का कहना है कि मरम्मत कार्य जमीन पर नहीं हुए, क्षति बताई गई लंबाई अव्यवहारिक है। डिविजन से मार्गदर्शन मांगा गया, जो अब तक नहीं मिला।

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