नांगल–घोलेट रवन्ना घोटाला, गुणवत्ता खराब होने के कारण 5 साल से बंद थीं खदान, इन्हीं के नाम पर हुआ फर्जीवाड़ा

{अवैध पत्थर को वैध बनाकर बेचा गया, 12 आरोपी नामजद… इन फर्जी रवन्नों का उपयोग नांगल और घोलेट क्षेत्र में अवैध खनन से निकाले गए पत्थर को वैध दिखाने के लिए किया गया। यह पत्थर जेपी एंड ब्रॉस, पारस इन्फ्रा, सीडीएस इन्फ्रा, बालाजी एंड कंपनी और शुभ लाभ स्टोन जैसे क्रेशर संचालकों द्वारा उपयोग में लाया गया। {जहां से निकला अवैध पत्थर, वहां अब पहाड़ नहीं गड्ढे हैं… नांगल और घोलेट क्षेत्र में जहां से अवैध खनन कर पत्थर निकाला गया, वहां कभी बड़े-बड़े पहाड़ हुआ करते थे। जांच में सामने आया है कि खनन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से खनन माफियाओं ने इन पहाड़ों को धीरे-धीरे खोखला कर दिया। जो खान वर्षों से बंद थी वहीं तैनात रहे अधिकारी कर्मचारी जिन खान में वर्षों में खनन बंद बताया गया, उन्हीं में वर्षों में खनिज विभाग के अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी तैनात रहे। कार्यालय खनिज अभियंता से प्राप्त रिकॉर्ड के अनुसार 9 अप्रैल 2019 से 22 मार्च 2024 तक ग्राम नांगल और घोलेट क्षेत्र में जीतेन्द्र तंवर, भीम सिंह चौधरी और वीरेन्द्र सिंह खनिज कार्यदेशक के रूप में पदस्थापित रहे। सरकारी वाहन RJ-27 UC 0794 और RJ-27 UA 5772 की लॉगबुक का 11 अगस्त 2021 से 22 मार्च 2024 तक अधिकारी और कर्मचारी इस अवधि में करीब 55 बार मौके पर गए। रंजन कुमार ठाकुर| भरतपुर ग्राम नांगल–घोलेट क्षेत्र की दो खदानों से जुड़े एक बड़े रवन्ना घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि खनन पट्टा संख्या 299/02 और 300/02, दोनों खानों में पत्थर की गुणवत्ता खराब होने के कारण पिछले 5 वर्षों से कोई खनन कार्य नहीं हो रहा था। इसके बावजूद इन्हीं खदानों के नाम पर लाखों टन पत्थर के रवन्ने जारी कर दिए गए। इन फर्जी रवन्नों के जरिए आसपास के इलाकों में हुए अवैध खनन को वैध दिखाया गया। इस तरह 6.88 लाख टन पत्थर के रवन्नों का दुरुपयोग किया गया। इस पूरे खेल से सरकार को रॉयल्टी, डीएमएफ, एनएमईटी और जुर्माने के रूप में करीब 22–23 करोड़ रुपए का नुकसान का अनुमान है। खनन पट्टा संख्या 299/02 और 300/02 की मौके पर जांच की गई। दोनों पट्टे अभिषेक तंवर के नाम दर्ज हैं। मौके की रिपोर्ट में पाया गया कि खनन पट्टा संख्या 299/02 में खनन पिट की गणना के आधार पर अधिकतम 2.96 लाख टन मैसनरी स्टोन का ही खनन संभव था, जबकि रिकॉर्ड में इस पट्टे से 8 लाख टन खनिज के रवन्ने जारी दिखाए गए। यानी 5.03 लाख टन रवन्नों का दुरुपयोग हुआ। इसी तरह खनन पट्टा संख्या 300/02 में मौके पर कुल 3.15 लाख टन खनन पाया गया, जबकि रिकॉर्ड में 5 लाख टन के रवन्ने जारी होना दर्शाया गया। यहां 1.9 लाख टन का अंतर सामने आया। जांच में पाया गया कि मौके पर न तो किसी तरह का ताजा खनन मिला और न ही भारी मशीनरी के निशान। इसके उलट खनिज विभाग के रिकॉर्ड में लगातार खनन और रवन्ना निर्गमन दर्शाया जाता रहा। जांच में यह भी पाया गया कि वर्ष 2019–20 और उसके बाद के वर्षों में तैयार किए गए माइनिंग असेसमेंट मौके की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। इन असेसमेंट में ऐसे वर्षों में भी भारी खनन दर्शाया गया, जब खदानें व्यावहारिक रूप से बंद थीं।

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