लखनऊ के नाका इलाके में मंगलवार को प्रखर गुप्ता की मौत के विरोध में परिजनों ने घर के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया। आक्रोशित परिजन नाका पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए मृतक के ससुरालीजनों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते रहे। सूचना पर नाका थाना प्रभारी श्रीकांत राय फोर्स के साथ पहुंचे, तब जाकर मामला शांत हुआ। पुलिस के आश्वासन के बाद परिजनों ने अंतिम संस्कार किया। रानीगंज निवासी पेंट कारोबारी सुनील कुमार गुप्ता के बेटे प्रखर (31) ने रविवार देर रात घर की छत पर बने कमरे में चादर से फांसी लगाकर जान दे दी थी। सोमवार सुबह परिजनों ने शव देखा तो हड़कंप मच गया। पोस्टमॉर्टम के बाद मंगलवार को जब शव घर पहुंचा तो परिजन भड़क गए और कार्रवाई न होने पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। ससुराल वालों के खिलाफ FIR पुलिस मौजूदगी में दिए गए आश्वासन के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने अंतिम संस्कार किया। थाना प्रभारी के मुताबिक, मृतक की मां की तहरीर पर पत्नी प्रिया, ससुर ओम प्रकाश, सास और साले एकलव्य समेत अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। दो आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। ट्रेनी दरोगा पर उलटा मुकदमा दर्ज करने का आरोप प्रखर की मां सुनीता गुप्ता ने गंभीर आरोप लगाए कि 23 अक्टूबर की रात ससुराल पक्ष के करीब 12 लोग घर में घुसे और प्रखर व उनके पति सुनील को बेरहमी से पीटा। सूचना पर 112 पुलिस भी आई थी, लेकिन नाका पुलिस ने उनकी तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके उलट, अगले ही दिन प्रिया की तहरीर पर एक ट्रेनी दरोगा ने प्रखर के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर दिया। पीड़िता का कहना है कि सीएम और पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद भी उनकी FIR दर्ज नहीं की गई। करीब एक माह पहले भी प्रिया की तहरीर पर दहेज प्रताड़ना की एफआईआर दर्ज की गई थी। पत्नी बोली- “जाकर मर जाओ” सुनीता गुप्ता के अनुसार, रविवार रात करीब 10 बजे प्रखर रोता हुआ घर आया। उसने बताया कि रास्ते में पत्नी प्रिया और उसके पिता ओम प्रकाश मिले थे। दोनों उसे अरेस्ट स्टे कैंसिल कराकर जेल भेजने की धमकी दे रहे थे। प्रखर ने सुलह की बात कही तो प्रिया ने उसे ताना मारते हुए कहा “जा कर मर जाओ”।मां का दावा है कि यही बात उसके बेटे के टूटने और आत्महत्या की वजह बनी।


