डीडवाना के नागोरिया मठ बस्ती में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के देखरेख में एक हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। यह सम्मेलन नागोरिया पीठाधीश्वर स्वामी विष्णिप्रपंनाचार्य महाराज और संत मुकुक्षुराम महाराज के सान्निध्य में संपन्न हुआ। सम्मेलन से पहले गग्गड़ों के चौक स्थित सीताराम मंदिर से कलश यात्रा निकाली गई। इसमें महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया और मंगलगीत गाए। ढोल-नगाड़ों और जयघोष के साथ यह यात्रा पूरे क्षेत्र से गुजरी। स्वामी विष्णिप्रपंनाचार्य महाराज ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि हिंदू समाज की शक्ति उसके संस्कार, संगठन और सेवा में है। उन्होंने युवाओं से सनातन मूल्यों से जुड़ने, सामाजिक समरसता बढ़ाने और राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। संत मुकुक्षुराम महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण और राष्ट्रसेवा का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि एक संगठित, संस्कारित और जागरूक हिंदू समाज ही सशक्त भारत की नींव रख सकता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के विस्तारक और मुख्य वक्ता रुद्रकुमार ने हिंदू समाज की वर्तमान चुनौतियों, संगठन की आवश्यकता और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में महेंद्र पुरोहित और बनवारी काकड़ा ने भजन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का संचालन अशोक गुड़गिला ने किया, जबकि भरत गट्टानी ने प्रस्तावना प्रस्तुत की। मातृ शक्ति की ओर से कोमल भराणी ने सामाजिक जागरूकता पर अपने विचार रखे। समापन पर मनीष ओझा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाएं और हिंदू बंधु मौजूद रहे। यह आयोजन हिंदू एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रसेवा के संकल्प के साथ संपन्न हुआ। अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया।


