नागौर जिले की मुख्य कृषि उपज मंडी में मूंग की सरकारी खरीद को लेकर अव्यवस्थाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। गुरुवार को एक बार फिर किसानों का धैर्य जवाब दे गया और उन्होंने मंडी के गेट पर ताला लगाकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि तुलाई में बड़े पैमाने पर मनमानी और अनियमितताएं बरती जा रही हैं, जिससे आम किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है।
10 दिनों से इंतजार, फिर भी नहीं आ रहा नंबर प्रदर्शनकारी किसानों ने प्रशासन के दावों की पोल खोलते हुए बताया कि वे पिछले दस दिनों से मंडी में अपना मूंग लेकर बैठे हैं, लेकिन उनका नंबर नहीं आ रहा है। कड़ाके की ठंड में रातें काट रहे किसानों का कहना है कि तुलाई प्रक्रिया बेहद धीमी और भेदभावपूर्ण है, जिसके कारण घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें खाली हाथ रहना पड़ रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा सुनवाई न किए जाने से किसानों में भारी रोष व्याप्त है।
तुलाई में गड़बड़ी और छंटनी के नाम पर बड़ा खेल किसानों ने सबसे गंभीर आरोप मूंग की छंटनी और गुणवत्ता जांच को लेकर लगाए हैं। किसानों के अनुसार मशीनों के जरिए की जा रही छंटनी में भारी विसंगतियां हैं, जहाँ बीस क्विंटल मूंग मशीन में डालने पर करीब पंद्रह क्विंटल को खारिज कर दिया जाता है और मात्र पांच क्विंटल ही पास किया जा रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में रिजेक्शन के कारण किसान आर्थिक रूप से टूट रहे हैं। किसानों ने मशीनों की सेटिंग और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर भी गहरे सवाल उठाए हैं।
अधिकारियों की चुप्पी के बाद बढ़ा आक्रोश विरोध कर रहे किसानों ने बताया कि जब वे अपनी शिकायत लेकर सहकारी समिति के पास पहुंचे, तो वहां से कोई संतोषजनक समाधान नहीं मिला। उल्टा सुबह बिना किसी पूर्व सूचना के तुलाई बंद कर दी गई और कर्मचारी दफ्तरों में ताला लगाकर चले गए। इसी उपेक्षा से आक्रोशित होकर किसानों ने मंडी के मुख्य गेट को बंद कर दिया और धरने पर बैठ गए। गौरतलब है कि पिछले दिनों हुए हंगामे के बाद प्रशासन ने कांटों की संख्या बढ़ाने और सुविधाएं बेहतर करने का दावा किया था, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
मंडी सचिव ने कराई समझाइश, सुचारु हुई तुलाई मामले की गंभीरता और बढ़ते बवाल की जानकारी मिलने के बाद कृषि मंडी सचिव रघुनाथ राम सिंवर तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित किसानों के बीच जाकर उनसे विस्तार से बात की और समझाइश का प्रयास किया। किसानों ने सचिव के सामने अपनी व्यथा रखी और तुरंत तुलाई चालू करवाने की मांग पर अड़ गए। इस पर सचिव सिंवर ने तत्काल कोऑपरेटिव सोसाइटी प्रभारी से वार्ता की और तुलाई प्रक्रिया को तुरंत सुचारु करने के निर्देश दिए। सचिव के हस्तक्षेप और समाधान के आश्वासन के बाद किसानों ने अपना धरना समाप्त किया और मंडी का गेट खोला, जिसके बाद मंडी में कार्य सुचारु रूप से शुरू हो पाया।


