नागौर में पंचायत समिति मुख्यालय को लेकर घमासान:अलाय के ग्रामीणों का धरना जारी, श्रीबालाजी के लोग सड़क पर उतरे

नागौर जिले में नई पंचायत समिति के मुख्यालय को लेकर चल रहा विवाद अब और गहराता जा रहा है। जहां एक ओर अलाय को पंचायत समिति बनाने की मांग को लेकर पिछले 12 दिनों से अनिश्चितकालीन धरना जारी है, वहीं अब श्रीबालाजी के ग्रामीणों ने भी खुलकर विरोध का मोर्चा संभाल लिया है। सोमवार को श्रीबालाजी क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। परिवहन और प्रशासनिक सुविधाओं का दिया हवाला कलेक्ट्रेट में सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि भौगोलिक, प्रशासनिक और जनसुविधा के लिहाज से श्रीबालाजी पंचायत समिति मुख्यालय के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। ग्रामीणों का तर्क है कि सुगम यातायात व्यवस्था: श्रीबालाजी से आसपास के गांवों के लिए बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन के पर्याप्त साधन उपलब्ध हैं। जबकि अलाय पहुंचने के लिए ग्रामीणों को निजी वाहनों या महंगे किराए पर निर्भर रहना पड़ेगा। पहले से मौजूद सुविधाएं: श्रीबालाजी में पहले से अस्पताल, उपतहसील और पुलिस थाना संचालित हैं। पंचायत समिति मुख्यालय बनने से आमजन को अपने अधिकतर सरकारी काम एक ही स्थान पर निपटाने में सुविधा मिलेगी। ‘राजनीति चमकाने’ का लगाया आरोप प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने अलाय में चल रहे आंदोलन पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां कुछ लोग व्यक्तिगत राजनीति चमकाने के लिए विकास में बाधा डाल रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अलाय के धरने में स्थानीय ग्रामीणों से ज्यादा बाहरी लोगों की मौजूदगी देखी जा रही है।ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सरकार ने जनहित को ध्यान में रखते हुए श्रीबालाजी को पंचायत समिति घोषित किया है, जिसका क्षेत्रवासी स्वागत करते हैं। फैसला बदला तो उग्र आंदोलन की चेतावनी श्रीबालाजी के ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि राजनीतिक दबाव में आकर सरकार ने अपने फैसले में कोई बदलाव किया, तो इसे क्षेत्र की जनता के साथ कुठाराघात माना जाएगा।ग्रामीणों ने कहा कि अगर पंचायत समिति मुख्यालय श्रीबालाजी से हटाया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। अलाय के ग्रामीण धरने पर डटे उल्लेखनीय है कि अलाय को पंचायत समिति मुख्यालय बनाने की मांग को लेकर ग्रामीण 17 दिसंबर से पशु प्रदर्शनी स्थल पर धरने पर बैठे हैं। कड़ाके की ठंड के बावजूद प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।अब श्रीबालाजी के पक्ष में सामने आए इस नए विरोध ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ अड़े हुए हैं।

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