श्रीनाथजी मंदिर की परंपरा के अनुसार नाथद्वारा में धुलंडी के अवसर पर मंगलवार रात्रि नगर में ‘बादशाह की सवारी’ निकाली गई। बादशाह बने व्यक्ति ने नवधा भक्ति के प्रतीक नौ सीढ़ियों को अपनी दाढ़ी से साफ किया। पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर में आयोजित इस अनूठी परंपरा को देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। गुर्जरपुरा से शुरू हुई शाही सवारी सवारी की शुरुआत गुर्जरपुरा स्थित बादशाह गली से हुई। बादशाह का रूप धारण किए व्यक्ति ने नकली दाढ़ी-मूंछ, मुगलकालीन पोशाक और आंखों में काजल लगाकर दोनों हाथों में श्रीनाथजी की छवि धारण की। वह पालकी में सवार होकर पूरे ठाठ-बाठ के साथ नगर भ्रमण पर निकला। मंदिर मंडल का बैंड बांसुरी की मधुर धुनों के साथ सवारी की अगवानी कर रहा था, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। दाढ़ी से साफ की नवधा भक्ति की सीढ़ियां सवारी मंदिर की परिक्रमा करते हुए सूरजपोल पहुंची। यहां बादशाह बने व्यक्ति ने नवधा भक्ति के प्रतीक नौ सीढ़ियों को अपनी दाढ़ी से साफ किया। यह दृश्य देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इसके बाद मंदिर के परछना विभाग के मुखिया ने बादशाह को वस्त्र और आभूषण भेंट किए। परंपरा के अनुसार उपस्थित जनसमूह ने उसे खरी-खोटी भी सुनाई, जो इस आयोजन का हिस्सा माना जाता है। औरंगजेब काल से जुड़ी मान्यता मान्यता है कि यह परंपरा मुगल बादशाह औरंगजेब के समय से जुड़ी एक ऐतिहासिक घटना की स्मृति में निभाई जाती है। वर्षों पुरानी इस परंपरा को आज भी श्रद्धा और उत्साह के साथ जीवंत रखा गया है।


