नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाला केस के गवाहों को प्रभावित करने के मामले में सीबीआई ने रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा के अलावा डॉ. आलोक शुक्ला के घर पर भी छापेमारी की। दोनों पूर्व अधिकारियों के घर की तलाशी के दौरान सीबीआई को कई आपत्तिजनक दस्तावेज मिले है। सीबीआई इस मामले में एसीबी-ईओडब्ल्यू के तत्कालीन चीफ की भूमिका की भी जांच कर रही है। उन्हें पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी है। क्योंकि उन पर आरोप है कि आरोपियों को जमानत लाभ देने के लिए विभागीय दस्तावेजों और नान प्रकरण में उच्च न्यायालय में दाखिल किए जाने वाले जवाबों में फेरबदल करवाया। आरोपियों के अनुसार जवाब तैयार किया गया है। इसका सीबीआई को मोबाइल पर चैट मिला है। इसके लिए तत्कालीन महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा को भी शामिल किया गया। इसीलिए इस मामले में सीबीआई ने एसीबी-ईओडब्ल्यू के प्रतिवेदन के आधार पर केस दर्ज किया है। इसमें आरोप है कि तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. आलोक और संयुक्त सचिव टुटेजा कांग्रेस सरकार में प्रभावशाली पदों पर थे और उनके हस्तक्षेप की चर्चा थी। इसी का फायदा उठाकर दोनों ने आपराधिक साजिश करते हुए ईओडब्ल्यू में 2015 में दर्ज नान घोटाले के सबूतों और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की। हाईकोर्ट में अपने पक्ष में जवाब तैयार कराए, ताकि अग्रिम जमानत का लाभ मिल सके।


