नारियल जल से अय्यप्पा अष्टाभिषेक, दक्षिण भारतीय संस्कृति हुई साकार

जयपुर | केरला समाज की ओर से शहर के तीनों अयप्पा मंदिरों में मनाए जा रहे मकरा विलक्कू महोत्सव का अनुष्ठान व सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ समापन हुआ। खातीपुरा स्थित अयप्पा मंदिर में दो दिवसीय मकरा विलक्कू महोत्सव के तहत सुबह पल्लि उणरत के बाद अष्ट द्रव्य महागणपति हवन हुआ। दिन में भगवान श्री अयप्पा का दूध, घी, शहद, नारियल पानी और विभिन्न द्रव्यों से अभिषेक किया। इस दौरान श्रद्धालु स्वामी शरणम्, अयप्पा शरणम् का सामूहिक मंत्र जाप करते रहे। शाम को फूलों की रंगोली से पुष्पालंकृत किया गया और चुट्टु विलक्कू के साथ महाआरती हुई। इसके बाद 1008 दीपों से मंदिर के चारों ओर चुट्ट विलक्कू प्रज्वलित किया। 108 दीपों की दीपा स्थंभम भी जलाया गया। संध्या में महा दीपाराधना के बाद अयप्पा भजन समिति के कलाकारों ने भरतनाट्यम की प्रस्तुति दी। मोहिनीअट्टम क्लासिकल डांस, सेमी क्लासिकल डांस, सिनेमैटिक डांस, कथक, कैकोट्टीकलि और तिरुवातिराकलि प्रस्तुत किया। गोपालपुरा स्थित अयप्पा मंदिर में तीन दिवसीय 41वीं प्राण-प्रतिष्ठा समारोह और मकरा विलक्कू महोत्सव मनाया गया। आष्टाभिषेकम़ और भगवान अय्यप्पा का विभिन्न पदार्थों से अभिषेक किया गया। शयन आरती के पश्चात भक्तों को अन्नकूट प्रसादी वितरण किया। प्रवक्ता संजय कृष्णन ने बताया खातीपुरा में मकरा विलक्कू महोत्सव शबरीमाला के तर्ज पर विशेष पूजा-अर्चना हुई।

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