नाला का मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट 13 साल बाद भी चालू नहीं, मशीनों में लग रही जंग

उत्तम मुनि नाला प्रखंड क्षेत्र के पातुलिया ग्राम में 60 लाख की लागत से बना मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट 13 साल बाद भी शुरू नहीं हो सका। प्लांट के चालू नहीं होने से क्षेत्र के सैकड़ों पशुपालकों को दूध को बेचने 50 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल जाना पड़ता है। क्षेत्र के लोग आज भी इसके खुलने का इंतजार कर रहे है। लेकिन देखरेख के अभाव में प्लांट के बाहर जंगल-झाड़ उग गए है। क्षेत्र के पशुपालकों के लिए यह केंद्र चिंता का विषय बन गया है। इस प्लांट का उद्घाटन 15 अगस्त 2011 को तत्कालीन कृषि मंत्री सत्यानंद झा बाटुल ने किया। इस प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 5 हजार लीटर दूध प्रोसे​सिंग करने की है। जब इसका उद्घाटन हुआ तो यहां के पशुपालकों में यह उम्मीद जगी थी कि उनके स्वरोजगार का एक बेहतरीन जरिया बन जाएगा। साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। अब उन्हें अपना दूध बेचने के लिए पश्चिम बंगाल नहीं जाना पड़ेगा। लेकनि भागीय उदासीनता के कारण नतीजा यह हुआ कि मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट की मशीनें अब जंग खाने लगी हैं। दूध के लिए स्थानीय बाजार नहीं रहने के कारण क्षेत्र के पशुपालक अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि इसे कल-पुर्जे चोरी होते जा रहे है, जिसे देखने वाला कोई नहीं है। जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ दिलीप कुमार रजक ने कहा कि नाला प्रखंड में मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के चालू नहीं होने की जानकारी आपके माध्यम से मिली है। प्लांट को चालू करने के लिए निरीक्षण किया जाएगा और इस दिशा में सकारात्मक पहल की जाएगी । प्लांट में सभी प्रकार के दूध से बने उत्पादों का प्रसंस्करण किया जाता है। मशीन से दूध को प्रोसेस, स्टोर, पास्चराइज, पैकेज और आपूर्ति के लिए तैयार किया जाता है। इस संबंध में प्रखंड प्रमुख कलावती मुर्मू ने कहा कि सरकार को इस ओर ध्यान देनी चाहिए। इसके चालू हो जाने से क्षेत्र के पशुपालकों को दूध बेचने बाहर नहीं जाना। साथ ही किसानों की आय भी बढ़ेगी मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट बनाने का क्या था उद्देश्य दूध प्रोसेसिंग प्लांट का उद्देश्य क्षेत्र के पशुपालकों को दूसरे राज्यों में पलायन करने से रोकना है। प्रतिदिन दूध बेचकर गुजारा करने वाले लोगों को केन्द्र के माध्यम से ही रोजगार देना था।दुधारू गाय-भैंसों से मिलने वाले दूध को वे बाहर न जाकर अपने प्रोसेसिंग प्लांट में देने की योजना थी, ताकि नाला प्रखंड के पशुपालकों आत्म निर्भर बनाया जा सके। इसके चालू हो जाने से जीविकोपार्जन का एक बेहतर रास्ता खुल जाता । साथ ही क्षेत्र के पशुपालकों को सुविधा होती। क्या होता है दूध प्रोसेसिंग प्लांट

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