भास्कर न्यूज| महासमुंद सरायपाली ब्लॉक का कोकड़ी गांव अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। आजादी के इतने सालों बाद भी ग्राम पंचायत भीखापाली का यह आश्रित गांव बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा है। हैरानी की बात तो ये है कि सरायपाली ब्लॉक मुख्यालय से यह गांव महज 5 किमी दूर है। हालात इतने बदतर हैं कि स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है। वे अपनी यूनिफॉर्म गीली होने से बचाने के लिए उसे उतारकर हाथ में पकड़ते हैं और नाला पार करने के बाद स्कूल जाते हैं। ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। उन्होंने प्रशासन को अंतिम अल्टीमेटम दिया है यदि 26 जनवरी तक पुल निर्माण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 27 जनवरी से उग्र आंदोलन शुरू होगा। इतने साल गुजर जाने के बाद भी यहां अधिकारियों ने सुध नहीं ली है। पंचायत मद से खर्च कर सीमेंट की पाइप खरीदकर नाला में 100 ट्रिप मुरुम डलवाकर समतल कराया गया। लेकिन वह भी बरसात में बह गया। गांव से करीब 1 किमी दूर नाला है। वर्तमान में करीब नाला में करीब डेढ़ फीट पानी बह रहा है। इसी नालों को पार करके अभी भी ग्रामीण आवागमन कर रहे है। गांव में 2003 में भयानक बाढ़ आयी थी और ग्रामीणों को गांव छोड़कर पड़ोसी गांव बालसी में आश्रय लेना पड़ा था। इसके चलते कई करीब 20 से ज्यादा लोगों का मकान ढह गए थे। सरायपाली के कोकड़ी गांव के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है। उपसरपंच रंजन जांगड़े ने बताया कि खाट में उठाकर बीमार मरीज को 10 व्यक्ति नाला पार कराते है। तब कहीं जाकर वाहन की मदद से सरायपाली स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचाते है। बरसात के दिनों में नाला में तेज पानी के बहाव के कारण शिक्षक गांव तक नहीं पहुंच पाते है। गांव के 40 बच्चे बालसी और बानीगिरहोला में मिडिल और हाईस्कूल में पढ़ाई करने पहुंचते है। जिपं सीईओ ने बजट नहीं होने की बात कह लौटाया: ग्रामीणों ने जिपं पंचायत सीईओ हेमंत नंदनवार को समस्या बताई थी। जिस पर सीईओ ने कहा कि पुल बनाने में करीब 2 करोड़ रुपए इसमें खर्च आएगा। इसके लिए मेरे पास कोई बजट नहीं है। इसे लेकर विधायक और सांसद से मिलने की बात कहकर वापस लौटा दिया।


