भास्कर न्यूज | जशपुरनगर जशपुर की जीवनदायिनी बांकी नदी में अब शहर की नालियों का गंदा पानी नहीं जाएगा। नगरपालिका जशपुरनगर के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व उप मुख्यमंत्री अरूण साव द्वारा 6.92 करोड़ की लागत से बनने वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्वीकृति दी गई है। बांकी नदी के किनारे ही इस प्लांट की स्थापना कर नाले से आने वाले गंदे पानी का उपचार किया जाएगा। नदी में उपचारित किया हुआ साफ पानी छोड़ा जाएगा। नाली में बहने वाले गंदे पानी की वजह से नदी और तालाब के पानी प्रदूषित ना हों, इसे ध्यान में रखते हुए उप मुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री अरूण साव ने जशपुर के एसटीपी प्लांट के लिए राशि स्वीकृत किए जाने के बाद तत्काल निविदा निकाय द्वारा लगाए जाने के निर्देश दिए गए हैं। जशपुर विधायक रायमुनी भगत ने भी इसकी स्वीकृति के लिए काफी प्रयास किए थे। सीएमओ योगेश्वर उपाध्याय ने बताया कि उप मुख्यमंत्री के निर्देश के परिपालन में निविदा आमंत्रित किया गया है। ताकि जशपुर में गंदे पानी के निपटान का काम जल्द से जल्द शुरू किया जा सके। अब पूरे शहर की नालियों से आने वाले गंदे पानी एक जगह पर जमा होंगे। एसटीपी प्लांट में नाले से आए पानी का पहले उपचार किया जाएगा। उपचार के बाद साफ पानी ही बांकी नदी में छोड़ा जाएगा। इससे नदी के पानी की स्वच्छता बनी रहेगी और आगे इस पानी का उपयोग लोग प्रसाधन के रूप में या सिंचाई के लिए आसानी से कर पाएंगे। अबतक गंदे पानी के निपटान की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसी स्थिति में गंदा पानी खाली जमीन पर छोड़ा जा रहा था। कलेक्टर ने किया स्थल का निरीक्षण एसटीपी प्लांट की स्थापना को लेकर कलेक्टर रोहित व्यास, नगरपालिका प्रशासक और जशपुर एसडीएम आंेकार यादव, सीएमओ योगेश्वर उपाध्याय द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया। वर्तमान में बांकी नदी के किनारे जहां पर कंपोस्टिंग सेंटर है, वहां पर ही मुख्य नाले के पास एसटीपी प्लांट की स्थापना होनी है। यह स्थान शहर की सीमा के बार्डर पर है और नदी के किनारे। शहर की मुख्य नाली को इस स्थान पर खत्म किया जाएगा। ताकि पानी का ट्रीटमेंट हो सके और नदी में साफ पानी छोड़ा जा सके। शहरवासी बगैर किसी शक और संकोच के अब नदी के पानी का करेंगे उपयोग वर्तमान में जिस स्थान पर शहर के नाले का पानी मिलता, उस स्थान पर राजा हरिशचंद्र घाट व मुक्तिधाम है। हिन्दुओं में किसी की मृत्यु होने पर इसी स्थान पर मृतक का अंतिम संस्कार किया जाता है। मृतक के परिजन अग्नि संस्कार के बाद घाट में स्नान करते हैं। इसके बाद दशकर्म सहित अन्य कर्मकांड के लिए लोगों को शहर के देउलबंद तालाब में जाना पड़ता है। यदि नदी में नालियों का गंदा पानी मिलना बंद हो जाएगा तो लोग बगैर किसी शक और संकोच के नदी के पानी का उपयोग स्नान करने व अन्य कर्मकांड के लिए कर पाएंगे। मालूम हो कि बांकी नदी स्थित राजा हरिशचंद्र घाट ही शहर का सबसे बड़ा मुक्तिधाम है।


