निकाय चुनावों में देरी पर कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई:हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ संयम लोढ़ा की याचिका, तत्काल चुनाव करवाने की मांग

राजस्थान में शहरी निकायों का कार्यकाल पूरा होने के एक साल से ज्यादा की अवधि बीत जाने के बावजूद चुनाव नहीं करवाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई 19 दिसंबर को होगी। कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में तत्काल चुनाव करवाने के आदेश की मांग की है। इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने 14 नवंबर को संयम लोढ़ा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए सरकार को अप्रैल 2026 तक निकाय चुनाव करवाने के आदेश दिए थे। इस फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए तत्काल चुनाव करवाने के आदेश की मांग रखी है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि संवैधानिक प्रावधानों के हिसाब से शहरी निकायों का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही चुनाव करवाने चाहिए, जबकि 52 निकायों का कार्यकाल पूरा हुए साल भर होने के बावजूद इनके चुनाव टाले जा रहे हैं। शहरी निकायों में समय पर चुनाव नहीं करवाकर उनमें प्रशासक नियुक्त करना संवैधानिक प्रावधानों का खुला उल्लंघन है। हाई कोर्ट ने राजस्थान म्युनिसिपल एक्ट 2009 के सेक्शन 7 और 11 का भी ध्यान नहीं रखा, जिसमें साफ-साफ उल्लेख है कि कार्यकाल पूरा होने के बाद अतिरिक्त समय नहीं दिया जा सकता। चुनाव टालने के लिए शरारतपूर्ण देरी का षड्यंत्र
याचिकाकर्ता का तर्क है कि शहरी निकायों के चुनाव टाले नहीं जा सकते। इस पूरे मामले में चुनावों में शरारतपूर्ण देरी का षड्यंत्र लगता है और यह 74वें संविधान संशोधन का खुला उल्लंघन है। समय पर चुनाव नहीं होने के कारण कई तरह की बाधाएं उत्पन्न हो रही हैं। निकायों से कल्याणकारी योजनाओं में प्रशासनिक जिम्मेदारी और जवाबदेही प्रभावित हो रही है। इस व्यवस्थागत क्षति से नागरिकों को दिन प्रतिदिन कई तरह के नुकसान हो रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट से तत्काल दखल देने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल दखल देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया है कि उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2026 तक का समय देकर चुनाव को आगे बढ़ाने की छूट दे दी। उच्च न्यायालय का आदेश संवैधानिक प्रावधानों से अलग है। चुनाव को आगे बढ़ाना स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के भी खिलाफ है। संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत इसमें हस्तक्षेप की सख्त आवश्यकता है। निकायों के चुनाव अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाले जा सकते
शहरी निकायों के बोर्ड की अवधि पूरी होने बाद चुनाव अनिश्चितकाल तक के लिए नहीं टाले जा सकते। यह किसी भी कानून में नहीं है। पंचायतीराज संस्थाओं और स्थानीय निकायों के चुनाव उनके बोर्ड के कार्यकाल पूरा होने से पहले करवाने का संवैधानिक प्रावधान है। संविधान के आर्टिकल 234 में इसका साफ प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट पंजाब, गुजरात सहित कई राज्यों को जल्द चुनाव करवाने के आदेश दे चुका
सुप्रीम कोर्ट इससे पहले ऐसे मामलों में जल्द चुनाव करवाने के आदेश दे चुका है। गुजरात, पंजाब सहित कई राज्यों में पंचायतीराज और स्थानीय निकाय चुनाव समय पर नहीं करवाने पर सुप्रीम कोर्ट फटकार लगा चुका है। ऐसे मामलों में सुप्रीम कोर्ट तत्काल चुनाव करवाने के आदेश दे चुका है। ——-
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