निगम की सख्ती : जेडीए से 43 करोड़ रुपए की वसूली की तैयारी, 142 कॉलोनाइजरों को नोटिस

भास्कर न्यूज | जालंधर जालंधर नगर निगम में विभिन्न मदों में राजस्व वसूली न होने से करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान के मामले सामने आए हैं। पहले अवैध कॉलोनियों से रेगुलराइजेशन फीस की वसूली न करने का मामला उजागर हुआ। दूसरा मामला टेलीकम्युनिकेशन कंपनियों से 8 करोड़ रुपये की बकाया राशि न लेने का है। तीसरा मामला जेडीए से लाइसेंस लेकर विकसित की गई कॉलोनियों के 25 करोड़ रुपये के डेवलपमेंट चार्ज न वसूलने का सामने आया। अब चौथा मामला भी सामने आ चूका है। इसके तहत वर्ष 2008 से जालंधर शहर की सीमा में पुडा से मंजूरी लेकर विकसित की गई 37 कॉलोनियों के 18 करोड़ रुपये के डेवलपमेंट चार्ज जेडीए से नहीं लिए गए। यह राशि जेडीए को नगर निगम को देनी है। मेयर वनीत धीर और निगम कमिश्नर संदीप ऋषि ने इस संबंध में जेडीए अधिकारियों से संपर्क किया है। 18 करोड़ रुपये की वसूली को लेकर जल्द बैठक बुलाई जाएगी। नए वित्तीय वर्ष में विकास कार्यों के बिल भुगतान से पहले जेडीए से निगम द्वारा कुल 43 करोड़ रुपये की वसूली की उम्मीद जताई जा रही है। 142 कॉलोनियों की सूची तैयार, 15 दिन में बकाया जमा न करने पर केस दर्ज होगा अवैध कॉलोनियों की रेगुलराइजेशन फीस दबाने वाली कंपनियों की सूची भी तैयार कर ली गई है। जालंधर शहर की चार विधानसभा सीटों—वेस्ट, सेंट्रल, नॉर्थ और कैंट—में कुल 142 कॉलोनियां चिन्हित की गई हैं। नगर निगम ने संबंधित कॉलोनाइजरों को 15 दिन के भीतर बकाया राशि जमा कराने का नोटिस दिया है। चेतावनी दी गई है कि तय समय में भुगतान न करने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। कार्रवाई शुरू होते ही एक कॉलोनाइजर से 1 लाख रुपये और दूसरे से 6 लाख रुपये की राशि वसूल की गई है। अब प्रत्येक कॉलोनी की जमा और बकाया फीस का सत्यापन किया जा रहा है, साथ ही कॉलोनियों की वर्तमान स्थिति की भी जांच हो रही है। मेयर ने स्पष्ट कहा कि निगम का बनता हुआ पैसा हर हाल में वसूला जाएगा और नियमों की अवहेलना करने वालों पर केस दर्ज किया जाएगा। दरअसल, नगर निगम की बिल्डिंग ब्रांच को सभी कॉलोनाइजरों से सरकारी फीस वसूलने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पंजाब सरकार ने वर्ष 2013 में अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की नीति लागू की थी, जिसके तहत कॉलोनाइजरों को किस्तों में फीस जमा कराने की छूट दी गई थी। कई डेवलपर्स ने नीति के तहत आवेदन देकर शुरुआती 1-2 किस्तें जमा कराईं, जिससे प्लॉटों पर डिमोलिशन की कार्रवाई रुकी रही। इस दौरान प्लॉटों की बिक्री जारी रही, लेकिन शेष रेगुलराइजेशन फीस नगर निगम को नहीं दी गई। अब फंसी हुई राशि की वसूली के लिए निगम ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *