निगम ने हाईकोर्ट को बताया 30 इंफोर्समेंट कर्मियों को हटा दिया, 15 माह बाद 28 को बहाल कर लिया

रांची नगर निगम ने अजीबो-गरीब काम किया है। निगम के पूर्व प्रशासक अमित कुमार ने भ्रष्टाचार के आरोप में जिन 30 इंफोर्समेंट कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी थी। उसमें से 28 कर्मचारियों को 15 माह बाद निगम के अधिकारियों ने फिर से बहाल कर लिया। इंफोर्समेंट कर्मचारियों की बहाली इतनी गोपनीय तरीके से की गई कि इसकी भनक तक किसी को नहीं लगी। सबसे मजेदार बात है कि भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद निगम के पूर्व प्रशासक अमित कुमार ने हाईकोर्ट को बताया था कि 30 इंफोर्समेंट कर्मचारियों को हटा दिया गया है। उनकी सेवा समाप्त कर दी गई है। बचे हुए इंफोर्समेंट कर्मचारियों की वर्दी का रंग बदल दिया गया है। अब वे खाकी के बजाय नीले रंग की वर्दी पहनेंगे। साथ ही इंफोर्समेंट कर्मचारियों को अॉन स्पॉट फाइन वसूलने का अधिकार नहीं होगा। उन्हें सिर्फ चालान काटने की अनुमति दी जाएगी। निगम का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस श्री चंद्रशेखर आैर अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने स्वत: संज्ञान लिए इस मामले पर राज्य सरकार के महाधिवक्ता, मुख्य सचिव, नगर विकास विभाग के सचिव को ठोस निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद यह मामला पूरी तरह शांत हो गया। लेकिन पिछले सप्ताह निगम के अधिकारियों ने बिना कोई विज्ञापन जारी किए घूस लेने के आरोपी दो इंफोर्समेंट कर्मचारी को छोड़कर सभी 28 इंफोर्समेंटकर्मियों को बहाल कर लिया। इस संबंध में पूछने पर निगम के अधिकारियों ने एक दूसरे पर जवाब देने के लिए फेंका-फेंकी शुरू कर दी। नगरपालिका अधिनियम के विरुद्ध हुई थी बहाली, लोगों के बीच धौंस दिखाने के लिए दी गई खाकी वर्दी राजधानी रांची को व्यवस्थित करने और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के उद्देश्य से 2017 में पहली बार 9 इंफोर्समेंट कर्मचारियों की बहाली की गई थी। इन सभी कर्मचारियों को खाकी वर्दी दे दी गई थी। इसका पुलिस एसोसिएशन ने भारी विरोध किया था, क्योंकि, इंफोर्समेंटकर्मी और रांची पुलिस की वर्दी में कोई अंतर नहीं था। बाद में फिर 30 इंफोर्समेंटकर्मियों को बहाल कर लिया गया। नगर पालिका अधिनियम में इस तरह के किसी भी कर्मचारी की बहाली का कोई प्रावधान नहीं था, न ही उन्हें खाकी वर्दी देने का प्रावधान है। इनकी अनदेखी कर निगम के अधिकारियों ने निगम की धौंस दिखाने के लिए उन्हें खाकी वर्दी दी। इसका नतीजा हुआ कि पूरे शहर में घर- दुकानदार, ठेला-खोमचा, पार्किंग से अवैध वसूली शुरू हो गई। चुटिया के एक दुकानदार ने ट्रेड लाइसेंस के नाम पर वसूली की शिकायत की, तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। – संजय कुमार, अपर प्रशासक, निगम कांट्रेक्ट पर बहाली के लिए क्या है नियम रांची नगर निगम से सेवानिवृत्त एक पदाधिकारी ने बताया कि कांट्रेक्ट के आधार पर एक साल के लिए ही बहाली होती है। जब एक बार कांट्रेक्ट के आधार पर बहाल हुए कर्मचारी को हटा दिया जाता है, तो उसे दुबारा बहाल नहीं किया जाता है। यदि कभी पुन: उसी पद पर बहाली करने की जरूरत होती है, तो इसके लिए बाकायदा विज्ञापन जारी करके फिर से आवेदन मांगाया जाता है। बिना विज्ञापन जारी किए 15 महीने के बाद हटाए गए कांट्रेक्टकर्मियों को दोबारा रखने का कोई नियम नहीं है। यह सीधे-सीधे गैर कानूनी और गलत काम किया गया है। अपर प्रशासक बोले- परिस्थिति के अनुसार लिया जाता है निर्णय

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