मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली चोरी रोकने के नाम पर 65 लाख उपभोक्ताओं का डाटा खुले मंच पर डालने को साइबर एक्सपर्ट ने गंभीर लापरवाही बताया है। इससे साइबर अपराधियों के लिए उपभोक्ताओं की पहचान, लोकेशन और वित्तीय प्रोफाइल तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा। मप्र की अन्य विद्युत वितरण कंपनियों ने डाटा सिक्योरिटी के इसी खतरे को देखते हुए वी-मित्र एप को अपने जोन में अपनाने से इनकार कर दिया है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि कंपनी ने उपभोक्ताओं की लोकेशन, आईवीआरएस नंबर, जियो टैगिंग और अन्य विवरण वी-मित्र एप पर सार्वजनिक किए। अटैकर को सिर्फ कंपनी के सर्वर में सेंध लगाकर मोबाइल नंबर ही जुटाना शेष है। यदि देश की सभी बिजली कंपनियां इस तरह लोकेशन-आधारित उपभोक्ता डाटा सार्वजनिक करें, तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा खतरा बन जाएगा। एक साधारण स्क्रिप्ट से IVRS नंबर का दुरुपयोग कर उपभोक्ताओं के बिल इतिहास, खपत और अन्य निजी जानकारी निकाली जा सकती है। अपराधी यदि नकली पोर्टल या फिशिंग कॉल के जरिए उपभोक्ताओं को उनके पिछले बिलों का सही-सही डाटा बताने लगें, तो उपभोक्ता स्वाभाविक रूप से इसे असली मान लेंगे—यहीं से बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी का रास्ता खुलता है। बिल भुगतान में देरी करने वाले उपभोक्ता सबसे आसान शिकार बनते हैं, क्योंकि उन्हें रिमाइंडर कॉल और संदेशों की आदत होती है। भास्कर एक्सपर्ट – मुकेश चौधरी, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट साइबर अटैकर्स को खुला निमंत्रण
देश में साइबर क्राइम जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, ऐसे माहौल में 65 लाख उपभोक्ताओं का डाटा खुले मंच पर डाल देना जोखिम को कई गुना बढ़ा देगा। आसानी से उपलब्ध डाटा को दूसरे डाटा सेट्स के साथ जोड़कर बड़े फायनेंशियल क्राइम किए जा सकते हैं। कंपनी भले नाम या कुछ विवरण छिपाने की बात करे, लेकिन इंटरनेट पर पहले से फैला लीक डाटा किसी भी छोटे सुराग को बड़े धोखाधड़ी मॉडल में बदल सकता है।


