भास्कर न्यूज | कवर्धा पंडरिया स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकार शक्कर कारखाने में गन्ना बेचने वाले किसानों का 40 करोड़ रुपए का भुगतान बकाया है। कारखाने के पास किसानों को देने के लिए पैसे नहीं हैं। स्थिति ये है कि स्टॉक में 22 करोड़ रुपए का 64,370 क्विंटल शक्कर रखा हुआ है। वहीं अब मंडी बोर्ड से 20 करोड़ रुपए कर्ज लेने की प्रक्रिया चल रही है। इस बात की पुष्टि कारखाने के एमडी यूके कौशिक ने की है। बताया जा रहा है कि यह कारखाना घाटे में चल रहा है। जनवरी 2017 में कारखाने की स्थापना हुई थी। कारखाने खोलने के लिए नेशनल कॉपरेटिव डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एनसीडीसी) से 81 करोड़ रुपए लोन लिए थे। हाल ही में लोन का पैसा चुकाए हैं। लोन तो चुकता हो गया, पर पेराई सीजन 2024-25 में जिन किसानों से गन्ना खरीदे गए, उन्हें देने के लिए पैसे कम पड़ गए हैं। इसके चलते अब कारखाने को मंडी बोर्ड से 20 करोड़ रुपए कर्ज लेना पड़ रहा है। निजीकरण का विरोध, 8 मई को सौंपेंगे ज्ञापन: पंडरिया के शक्कर कारखाने के निजीकरण के विरोध में भारतीय किसान संघ 8 मई को मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन देंगे। किसान संघ के डोमन चंद्रवंशी ने बताया कि तय कार्यक्रम अनुसार 8 मई की शाम 4 बजे कलेक्टर परिसर कवर्धा में किसान एकजुट होंगे। भुगतान की स्थिति पर एक नजर पंडरिया में संचालित लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल सहकारी शक्कर उत्पादक कारखाना में पेराई सत्र 2024-25 के दौरान 24 नवंबर से 19 फरवरी तक क्षेत्र के 7659 पंजीकृत किसानों से कुल 15,01534.19 क्विंटल गन्ना खरीदे गए हैं। इसकी कुल कीमत 47,3133818 रुपए बनती है। इन किसानों से खरीदे गए 2,76917.85 क्विंटल गन्ने के बदले सिर्फ 7,8542461 रुपए ही दिए गए हैं। अब भी 39,4591357 रुपए का भुगतान पेंडिंग है। पंडरिया कारखाने के एमडी यूके कौशिक का कहना है कि शक्कर कारखाने के निजीकरण को लेकर शासन से अभी तक कोई लिखित निर्देश नहीं आया है। ये बातें हवा-हवाई हैं और कुछ नहीं। किसानों को गन्ने का 40 करोड़ रुपए भुगतान किया जाना है। कौशिक ने बताया मंडी बोर्ड से 20 करोड़ रुपए लोन ले रहे हैं।


